उत्तराखंड टिहरी गढ़वालTehri Youth Keshav Thalwal Protest Sparks Human Rights Intervention

उत्तराखंड: “मैं खुद का दाह संस्कार करूंगा..” जब केशव की दर्दनाक चेतावनी से हिला मानवाधिकार आयोग

केशव थलवाल के पुलिस पर गंभीर आरोपों के बाद इस मामले में मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेकर जांच की मांग की है। इस घटना ने उत्तराखंड में कानून व्यवस्था और पुलिस व्यवहार पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

Keshav Thalwal: Tehri Youth Keshav Thalwal Protest Sparks Human Rights Intervention
Image: Tehri Youth Keshav Thalwal Protest Sparks Human Rights Intervention (Source: Social Media)

टिहरी गढ़वाल: Keshav Singh Thalwal ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने साथ हुए कथित पुलिस दुर्व्यवहार को लेकर आवाज उठाई। उन्होंने दावा किया कि उन्हें इस हद तक अपमानित किया गया कि अब उनके पास जीने का कोई कारण नहीं बचा। मामले की गंभीरता को देखते हुए World Human Rights Protection Commission ने संज्ञान लिया। आयोग ने उत्तराखंड सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

Tehri Youth Keshav Thalwal’s Protest Sparks Human Rights Intervention

सोचिए वह कैसी कानून व्यवस्था होगी जिसमें एक युवा कानून के रखवालों के द्वारा किए गए दुराचार के बाद न्याय पाने के लिए अपनी जान देने को तैयार है। सोचिए कानून व्यवस्था के रखवालों द्वारा किस हद तक जलील किया गया कि केशव सिंह को यह कहना पड़ा कि "मैं बहुत जल्द स्वयं अपना दाह संस्कार करूंगा, मुझे ऐसा जीवन नहीं जीना जिस जीवन में मेरे सर पर किसी ने पेशाब की हो"। सोशल मीडिया पर हर दिन केशव थलवाल ये जंग लड़ते रहे.. कहते रहे कि "मैं अपना शरीर जिंदा रखूं या अपनी आत्मा को न्याय दिलवाऊं"। आगे पढ़िए..

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एक मुकाम तक पहुंची जंग

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल के केशव सिंह थलवाल ने अपने ऊपर हुए पुलिस द्वारा किए गए जुल्मों के खिलाफ जिस जंग का ऐलान किया था वह जंग आज एक मुकाम तक पहुंच रही है। विश्व मानवाधिकार संरक्षण आयोग ने इसका संज्ञान लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से जांच और आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

मानवाधिकारों पर सवाल बन गया केशव

केशव थलवाल का मामला सिर्फ एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और मानवाधिकारों से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है। आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या पीड़ितों को न्याय पाने के लिए इस हद तक जाना पड़ता है। अब सबकी नजरें जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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