उधमसिंह नगर: उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े जिस बड़े फर्जीवाड़े का विगत दिनों में रुद्रपुर पुलिस ने खुलासा किया था, उसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
Fake NCERT Books Worth Crores Seized in Uttarakhand, Case Registered
अभी तक पुलिस ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की लगभग नौ से 10 करोड़ रुपये मूल्य की 9.74 लाख नकली किताबें बरामद की हैं। कॉपीराइट एक्ट समेत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर पुलिस आगे की जांच कर रही है।
मेरठ ले जाई जा रही थी किताबें
एसएसपी अजय गणपति के अनुसार 14 मार्च की रात को पुलिस ने इस फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। पुलिस ने आनंदम रिजॉर्ट के पास एक संदिग्ध कैंटर यूपी 37 बीटी 0562 को रोक कर जांच की तो वाहन में एनसीआरटी के फर्जी किताबें पाई गईं। इन किताबों को मेरठ ले जाया जा रहा था, लेकिन उसके पास ई-वे बिल नहीं मिला और बिलों में भी गड़बड़ी पाई गई। संदेह होने पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो भारी मात्रा में नकली किताबें बरामद हुईं।
एनसीआरटी के नाम और लोगो मे गडबड़ी
इसके बाद पुलिस ने कीरतपुर कोलड़ा स्थित गोदाम पर छापा मारा। मजिस्ट्रेट और शिक्षा विभाग की मौजूदगी में गोदाम खुलवाया गया। उन्होंने बताया कि अभी तक जांच में 9.74 लाख किताबों का विशाल भंडार मिला है। जांच में सामने आया कि किताबों में एनसीआरटी के नाम और उसके लोगो मे गडबड़ी पाई गई है। कई किताबों पर एनसीआरटी की जगह एसीईआरटी लिखा हुआ है और अधिकांश में असली वॉटरमार्क भी नहीं पाया गया है।
9,74,085 फर्जी किताबें जब्त
दिल्ली से पहुंची एनसीईआरटी की टीम ने भी इसकी पुष्टि की कि किताबों की छपाई, कागज, बाइंडिंग और डिजाइन मानकों के अनुरूप नहीं हैं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह पूरी तरह नकली हैं और आम लोगों को धोखा देकर बाजार में खपाई जा रही थीं। गणपति के अनुसार जांच में अभी तक कुल 9,74,085 फर्जी किताबें जब्त की गईं। पुलिस ने इस मामले में संदीप समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ कोतवाली रुद्रपुर में भारतीय न्याय संहिता और कॉपीराइट एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, जिसमें प्रिंटिंग, सप्लाई और वितरण से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है।