नैनीताल: उत्तराखंड के Nainital जिला एवं सत्र न्यायालय ने लिव-इन पार्टनर दीक्षा की हत्या के मामले में अभियुक्त ऋषभ तिवारी उर्फ इमरान को दोषी करार दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश Prashant Joshi की अदालत ने सुनवाई के बाद आरोपी को हत्या का दोषी माना। सजा पर सुनवाई 26 फरवरी को होगी। फैसले के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
Imran Convicted in Nainital Live In Partner Murder Case
अभियोजन के अनुसार 14 अगस्त 2021 को आरोपी ऋषभ तिवारी उर्फ इमरान निवासी पटेल नगर, गाजियाबाद अपने साथियों के साथ नैनीताल घूमने आया था। उनके साथ श्वेता शर्मा, अल्मास और दीक्षा भी थीं। मल्लीताल स्थित होटल गैलेक्सी में दो कमरे बुक किए गए थे। एक कमरे में श्वेता और अल्मास ठहरे थे, जबकि दूसरे कमरे में इमरान और दीक्षा रुके थे। 16 अगस्त को जब दीक्षा फोन नहीं उठा रही थी और आरोपी का मोबाइल भी स्विच ऑफ मिला, तब साथियों ने कमरे का दरवाजा खुलवाया। कमरे में दीक्षा नग्न अवस्था में बेड पर पड़ी मिली। आरोपी मौके से फरार था। बाद में पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया।
17 गवाह और फॉरेंसिक रिपोर्ट बनी अहम साक्ष्य
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने अभियोजन पक्ष से 17 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इसके अलावा केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) की रिपोर्ट सहित अन्य दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए गए। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।
मामूली विवाद बना हत्या की वजह
अभियोजन के अनुसार आरोपी ने अपना मुस्लिम धर्म छिपाकर अपना नाम ऋषभ तिवारी रखा था और दीक्षा के साथ लिव-इन संबंध में रह रहा था। बताया गया कि नैनीताल प्रवास के दौरान आरोपी ने दीक्षा के मोबाइल में उसके पूर्व प्रेमी का संदेश देख लिया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। गुस्से में आरोपी ने दीक्षा का गला दबाकर हत्या कर दी।
नाम बदलकर रखा ऋषभ तिवारी
प्रॉपर्टी डीलिंग के काम के दौरान आरोपी की मुलाकात दीक्षा से हुई थी। दीक्षा जिस कॉलोनी में रहती थी, वहां अधिकांश परिवार हिंदू थे। अभियोजन के अनुसार इसी कारण आरोपी ने अपना नाम बदलकर ऋषभ तिवारी रख लिया था। दीक्षा की 2008 में शादी हुई थी, लेकिन दो साल बाद तलाक हो गया था। इसके बाद वह अलग-अलग समय में लिव-इन संबंधों में रही थी और आरोपी के साथ भी लिव-इन में रह रही थी। अब सभी की नजर 26 फरवरी को होने वाली सजा की सुनवाई पर टिकी है, जिसमें अदालत दोषी को सजा सुनाएगी।