उत्तराखंड देहरादूनdispute between two officers in Dehradun

देहरादून: DM सविन बंसल और कैंट बोर्ड CEO अंकिता सिंह के बीच विवाद, मुख्यमंत्री के पास पहुंची शिकायत

देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल और कैंटोनमेंट बोर्ड क्लेमेंट टाउन की CEO अंकिता सिंह के बीच बैठक में अनुपस्थिति को लेकर गंभीर प्रशासनिक विवाद सामने आया है। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है..

DM Savin Bnasal: dispute between two officers in Dehradun
Image: dispute between two officers in Dehradun (Source: Social Media)

देहरादून: अपने कड़े प्रशासनिक फैसलों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाले देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल इस बार किसी निर्णय नहीं, बल्कि एक गंभीर शिकायत और अफसरशाही टकराव को लेकर चर्चाओं में हैं। मामला देहरादून के कैंटोनमेंट बोर्ड क्लेमेंट टाउन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंकिता सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने जिलाधिकारी पर मानसिक उत्पीड़न और अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।

dispute between two officers in Dehradun

यह पूरा मामला जिलाधिकारी द्वारा बुलाई गई एक प्रशासनिक बैठक से जुड़ा है। इस बैठक में कैंटोनमेंट बोर्ड क्लेमेंट टाउन की CEO अंकिता सिंह स्वयं उपस्थित नहीं हुईं, हालांकि उनके अनुसार उन्होंने अपना प्रतिनिधि भेज दिया था। इससे नाराज होकर डीएम सविन बंसल ने कथित तौर पर आरटीओ और पुलिस की टीम को CEO के आवास भेजकर उनके सरकारी वाहन को जब्त कराने की कार्रवाई शुरू कर दी। यह वाहन रक्षा मंत्रालय की संपत्ति बताया जा रहा है।

अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई

इस कार्रवाई को लेकर CEO अंकिता सिंह ने पुष्कर सिंह धामी को भेजे गए शिकायती पत्र में तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने लिखा— “यह मामला एक केंद्रीय महिला अधिकारी के मानसिक उत्पीड़न का है। किसी प्रशासनिक अधिकारी द्वारा हिटलरशाही रवैया अपनाते हुए मेरे घर पुलिस और आरटीओ की टीम भेजी गई। न देश में और न ही प्रदेश में कोई आपातकाल लागू है, फिर भी मोटर व्हीकल एक्ट के तहत इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल कर मेरे सरकारी वाहन को जब्त करने के आदेश दिए गए।”

DM को नहीं है रक्षा मंत्रालय के वाहन जब्त करने का अधिकार

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कैंटोनमेंट बोर्ड क्लेमेंट टाउन रक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है, जिसका कार्यक्षेत्र जिलाधिकारी के अधिकार क्षेत्र से पूरी तरह अलग है। ऐसे में रक्षा मंत्रालय के वाहन को जब्त करने का अधिकार जिलाधिकारी को नहीं है। अंकिता सिंह ने इसे कार्य क्षेत्र का उल्लंघन और जेंडर डिस्क्रिमिनेशन बताते हुए कहा कि एक महिला अधिकारी को अपमानित और नीचा दिखाने की कोशिश की गई है। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद दिनभर मीडिया कर्मियों ने देहरादून डीएम से उनका पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन डीएम सविन बंसल ने न तो बयान दिया और न ही फोन उठाया। हालांकि, देर शाम जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से एक आधिकारिक स्पष्टीकरण नोट जारी किया गया।

DM कार्यालय का पक्ष: जनगणना कार्य में लापरवाही

डीएम कार्यालय के अनुसार, भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने आगामी जनगणना प्रक्रिया को देखते हुए जिलाधिकारी को प्रमुख जनगणना अधिकारी नामित किया है। इसके तहत— जनगणना चार्ज अधिकारियों की नियुक्ति, क्षेत्र निर्धारण, अंतरविभागीय समन्वय और समयबद्ध बैठकें अनिवार्य हैं। स्पष्टीकरण में कहा गया कि 28 जनवरी 2026 को निदेशक जनगणना (गृह मंत्रालय) और जिला प्रशासन की संयुक्त बैठक बुलाई गई थी, जिसकी लिखित और मौखिक सूचना दोनों कैंट बोर्ड अधिकारियों को दी गई थी। इसके बावजूद वे बैठक में उपस्थित नहीं हुए, जिस पर निदेशक जनगणना ने कड़ा रोष जताया। इसके बाद 31 जनवरी 2026 को दोबारा बैठक बुलाई गई, जिसमें भी दोनों अधिकारी अनुपस्थित रहे। इससे संबंधित छावनी क्षेत्रों का जनगणना क्षेत्र निर्धारण नहीं हो सका।

Census Act के तहत कार्रवाई की तैयारी

डीएम कार्यालय के अनुसार, इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए निदेशक जनगणना (गृह मंत्रालय) ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ Census Act, 1948 के तहत कार्रवाई की संस्तुति की है। अब Census Act 1948 की धारा 6, 7 और 11 के अंतर्गत अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा रही है, जिनमें एक माह तक के कारावास का प्रावधान भी है।

रक्षा मंत्री के दौरे में उठ सकता है मामला

खास बात यह है कि आने वाले दिनों में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का उत्तराखंड दौरा प्रस्तावित है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि यह मामला रक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार के संज्ञान में भी लाया जा सकता है।

प्रशासनिक सख्ती या अधिकारों का टकराव?

अब यह मामला राज्य और केंद्र के अधिकार क्षेत्र, महिला अधिकारी के सम्मान, और प्रशासनिक शक्तियों की सीमाओं पर बड़ा सवाल बन चुका है।
फिलहाल सभी की नजरें मुख्यमंत्री कार्यालय और संभावित केंद्रीय हस्तक्षेप पर टिकी हैं—कि इस हाई-प्रोफाइल प्रशासनिक विवाद में अगला कदम क्या होगा।