उत्तराखंड देहरादूनElectricity Court Finds UPCL Guilty in 90 Present Complaints

उत्तराखंड: 90% मामलों में UPCL की गलती उजागर, बिजली कोर्ट ने किया बड़ा खुलासा

नैनीताल में बिजली बिल और मीटर से जुड़ी शिकायतों की संख्या सबसे अधिक है। विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम ने पिछले वित्तीय वर्ष में 239 मामलों का निस्तारण किया, जिनमें 90% मामलों में ऊर्जा निगम की गलती पाई गई और उपभोक्ताओं को राहत दी गई।

Nainital Electricity Complaint: Electricity Court Finds UPCL Guilty in 90 Present Complaints
Image: Electricity Court Finds UPCL Guilty in 90 Present Complaints (Source: Social Media)

देहरादून: नैनीताल जिले में बिजली उपभोक्ताओं की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। खासकर बिजली के मीटर और बिलों को लेकर उपभोक्ता सबसे अधिक परेशान हैं। विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम की रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि अधिकांश मामलों में उपभोक्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा निगम की लापरवाही जिम्मेदार है।

उत्तराखंड: 90% मामलों में UPCL की गलती उजागर, बिजली कोर्ट ने किया बड़ा खुलासा

विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में नैनीताल जिले से दर्ज होने वाली शिकायतों में मीटर और बिल से जुड़े मामले सबसे अधिक हैं। कम खपत के बावजूद ज्यादा बिल आने, स्मार्ट मीटर की गलत रीडिंग और मीटर लगाने में लापरवाही जैसी शिकायतों की भरमार है। फोरम की सुनवाई में सामने आया कि लगभग 90 प्रतिशत मामलों में ऊर्जा निगम की गलती पाई गई, जिसके बाद अधिकतर फैसले उपभोक्ताओं के पक्ष में दिए गए।

एक साल में 239 मामलों का निस्तारण

फोरम के रिकॉर्ड के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024–25 में कुल 223 नए मामले दर्ज हुए, जबकि कुल 239 शिकायतों का निस्तारण किया गया। इनमें से 211 मामलों में निर्णय उपभोक्ताओं के पक्ष में आया, जबकि केवल 28 मामलों में ऊर्जा निगम को राहत मिली। निस्तारित मामलों में से 164 शिकायतें सीधे तौर पर बिल और मीटर से संबंधित थीं। इनमें 145 मामलों में फोरम ने ऊर्जा निगम की खामियां पाईं और उपभोक्ताओं को राहत प्रदान की।

स्मार्ट मीटर में लापरवाही भी आई सामने

फोरम के सदस्य न्यायिक विष्णु प्रसाद डोभाल, सदस्य तकनीकी तिलक राज भाटिया और सदस्य उपभोक्ता हिमांशु बहुगुणा की तीन सदस्यीय पीठ ने कई मामलों में स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियों की लापरवाही को भी उजागर किया।
चालू वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में 50 नई शिकायतें दर्ज हुईं और कुल 59 मामलों का निस्तारण किया गया। इनमें से 49 मामले मीटर और बिल से जुड़े थे, जिनमें 42 मामलों में फैसला उपभोक्ताओं के पक्ष में आया।

60 दिन से कम समय में मिल रही राहत

फोरम ने अधिकांश शिकायतों का निस्तारण 60 दिनों से भी कम समय में किया है। यह उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है, लेकिन साथ ही यह भी दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान न होने के कारण उपभोक्ताओं को फोरम का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।

कम खपत, भारी भरकम बिल

इंद्रानगर रानीबाग निवासी मोहन सिंह थार ने नौ सितंबर को फोरम में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्हें अप्रैल में 1423 यूनिट और मई में 1188 यूनिट के आधार पर 17,603 रुपये का बिल भेजा गया था। जांच के बाद फोरम ने आदेश दिया कि दोनों महीनों के बिल 210 यूनिट प्रति बिल चक्र के आधार पर संशोधित किए जाएं और उपभोक्ता से कोई विलंब शुल्क या अधिभार न लिया जाए।

सोलर प्लांट की रीडिंग शून्य दिखाई गई

मां कालिका कॉलोनी निवासी आनंद सिंह परिहार ने सोलर प्लांट से जुड़ी शिकायत दर्ज कराई थी। अप्रैल से अगस्त तक उनके मीटर में सोलर उत्पादन शून्य दिखाया जा रहा था और उन्हें कोई भुगतान नहीं मिला। फोरम के आदेश पर हुई जांच में सामने आया कि स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी के कर्मचारियों ने गलत मीटर लगाया था। फोरम ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला देते हुए नुकसान की भरपाई संबंधित कंपनी से करवाई।

उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी और सबक

फोरम के आंकड़े यह साफ संकेत देते हैं कि बिजली बिल और मीटर से जुड़ी समस्याएं व्यापक हैं। उपभोक्ताओं को अपने बिलों की नियमित जांच करनी चाहिए और गड़बड़ी पाए जाने पर समय रहते शिकायत दर्ज करानी चाहिए।