उत्तराखंड पिथौरागढ़Protest against Supreme Court decision in Pithoragarh

उत्तराखंड: 6 साल की मासूम का अपहरण, दुष्कर्म और हत्या.. सुप्रीम कोर्ट ने दरिंदे को किया रिहा

नन्ही परी केस को रीओपन कराए जाने की मांग को लेकर सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग, युवा, व्यापारी, कर्मचारी संगठन, पूर्व सैनिक और सभी सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि इक्कट्ठे हुए और न्याय की मांग की..

नन्ही परी केस: Protest against Supreme Court decision in Pithoragarh
Image: Protest against Supreme Court decision in Pithoragarh (Source: Social Media)

पिथौरागढ़: पिथौरागढ़ की 6 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुए अपहरण, दुष्कर्म और निर्मम हत्या के मुख्य आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से बरी किए जाने के फैसले ने पूरे कुमाऊँ में जनाक्रोश भड़का दिया है। बेरीनाग में भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और मासूम को न्याय दिलाने के लिए कैंडल मार्च निकाली। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि दोषियों को फांसी की सजा नहीं दी गई, तो ये आंदोलन उग्र रूप धारण करेगा।

Protest against Supreme Court decision in Pithoragarh

बीते सोमवार को देर शाम पिथौरागढ़ की नन्ही परी केस को रीओपन कराए जाने की मांग को लेकर लोनिवि अतिथि गृह से शुरू हुआ कैंडल मार्च शहीद चौक तक पहुंचा। इस कैंडल मार्च में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग, युवा, व्यापारी, कर्मचारी संगठन, पूर्व सैनिक और विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। लोग हाथों में मोमबत्तियां और तख्तियां लिए नारेबाजी करते आगे बढ़े। पूरा क्षेत्र "न्याय दो... न्याय दो... बेटी हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं..." के नारों से गूंज उठा। जनता का कहना है कि जब तक बच्ची के हत्यारों को सख्त से सख्त सजा नहीं मिलती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

नन्ही परी केस को रिओपन करने की मांग

जनता का कहना है सरकार को तत्काल सुप्रीम कोर्ट में नन्ही परी केस को दोबारा खोलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि दरिंदों को फांसी की सजा नहीं दी गई, तो यह आंदोलन उग्र रूप धारण करेगा। बेरीनाग के साथ गंगोलीहाट में भी विभिन्न संगठनों ने कैंडल मार्च निकालकर मासूम बच्ची को न्याय दिलाने की मांग की। वहां भी लोगों ने एक स्वर में कहा कि ऐसी दरिंदगी करने वालों को फांसी से कम सजा स्वीकार्य नहीं है।

जानिए क्या है पूरा मामला

गौरतलब हो कि 20 नवंबर 2014 को काठगोदाम (हल्द्वानी) से छह वर्षीय मासूम अपने परिवार के साथ शादी समारोह में शामिल होने पिथौरागढ़ आई हुई थी। इसी दौरान बच्ची अचानक लापता हो गई। छह दिन तक तलाश जारी रही, लेकिन बच्ची का कोई पता नहीं चला, फिर सातवें दिन उसका शव गौला नदी से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ गैंगरेप के बाद हत्या की पुष्टि हुई। इस घटना के आठ दिन बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी अख्तर अली को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया था।

कोर्ट ने बरी किया अख्तर अली

पुलिस ने मुख्य आरोपी अख्तर अली के साथ ही दो अन्य आरोपी प्रेमपाल और जूनियर मसीह को भी हिरासत में लिया था। मार्च 2016 में हल्द्वानी की एडीजे स्पेशल कोर्ट ने अख्तर अली को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। वहीं, प्रेमपाल को 5 साल की सजा दी गई। अक्टूबर 2019 में नैनीताल हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी अख्तर अली को बरी कर दिया। इस फैसले के बाद से पूरे कुमाऊं क्षेत्र में गुस्से की लहर दौड़ गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतनी भयावह वारदात का आरोपी कैसे बरी हो सकता है, और वे मांग कर रहे हैं कि इस केस को दोबारा खोला जाए और दोषियों को फांसी की सजा दी जाए।

वकीलों से सलाह ले रही सरकार: CM धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नन्ही परी के पिता से बातचीत कर उन्हें आश्वस्त किया कि राज्य सरकार पूरी तरह से उनके साथ है। रविवार को भाजपा नेता नन्ही परी के परिवार से मिलने पहुंचे। सीएम धामी ने नन्ही परी के परिवार को फोन पर बताया कि इस मामले में न्याय विभाग और वरिष्ठ वकीलों से कानूनी सलाह ली जा रही है। मुख्यमंत्री आवास पर विस्तृत चर्चा के बाद राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष गिरीश जोशी आदि उपस्थित रहे।