देहरादून: उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बर्फीली चोटियों के लिए पहले से ही देश-विदेश के पर्यटकों में प्रसिद्ध है। हर साल हजारों देशी-विदेशी पर्यटक फूलों की घाटी, केदारताल, डोडीताल, दयारा बुग्याल, पिंडारी ग्लेशियर और हर की दून जैसे सैकड़ों ट्रैक के लिए उत्तराखंड आते हैं। लेकिन अब तक इन ट्रैकिंग रूट्स की वैज्ञानिक और व्यवस्थित पहचान नहीं थी। अब पर्यटन विभाग और वन विभाग ने प्रदेश में एडवेंचर टूरिज़्म को बढ़ावा देने और ट्रैकिंग को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए एक बड़ी योजना बनाई है।
First digital mapping of trekking routes in Uttarakhand
उत्तराखंड राज्य की स्थापना के 25 साल बाद पर्यटन विभाग पहली बार इस दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग अब प्रदेश के सभी मुख्य ट्रैकिंग स्थलों की डिजिटल मैपिंग करने जा रहा है। इससे ट्रैकिंग रूट्स का वैज्ञानिक चिन्हीकरण होने के साथ ही पर्यटकों की सुरक्षा भी और मजबूत हो पाएगी। डिजिटल मैपिंग से ट्रैकिंग के दौरान खतरनाक इलाकों की पहचान, आपात स्थिति में त्वरित मदद और सुविधाओं के विकास की योजना बनाना आसान होगा। इससे ट्रैकिंग का अनुभव अधिक सुरक्षित और आकर्षक हो सकेगा।
शासन को भेजा गया नियमावली का ड्राफ्ट
इसके अलावा इस पूरी व्यवस्था को कानूनी रूप देने के लिए एक विशेष नियमावली भी बनाई जा रही है। इसके लिए पर्यटन विभाग ने वन विभाग को नियमावली का ड्राफ्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। मुख्य वन संरक्षक पी.के. पात्रो ने यह ड्राफ्ट तैयार होने के बाद शासन को भेज दिया है। इस ड्राफ्ट में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, आपदा प्रबंधन, पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधाओं जैसी कई अहम बातें शामिल की गई हैं। इस ड्राफ्ट में विभिन्न संस्थाओं और विशेषज्ञों के सुझावों को भी जोड़ा गया है। अनुमान है कि जल्द ही नियमावली का अंतिम प्रारूप तैयार कर शासन द्वारा इसे मंजूरी दे दी जाएगी।
अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताया कि उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटक ऐसे स्थलों पर तभी आते हैं जब उन्हें सुरक्षा और बेहतर व्यवस्थाएं मिलें। इसी को देखते हुए ट्रैकिंग रूट्स की डिजिटल मैपिंग और नियमावली तैयार की जा रही है। राज्य सरकार की इस पहल से पर्यटकों को सुरक्षित और व्यवस्थित अनुभव मिलने के साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। डिजिटल तकनीक और सख्त नियमावली के ज़रिए अब उत्तराखंड ट्रैकिंग पर्यटन को नई पहचान मिलेगी।