रुद्रप्रयाग: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इटावा में केदारेश्वर नामक मंदिर का निर्माण करवाया है, जो पूरी तरह से केदारनाथ मंदिर के समान है। इस कारण केदारनाथ धाम के तीर्थ-पुरोहित और भाजपा की विपक्षी पार्टियाँ इसका विरोध कर रही हैं। मामले में विवाद पड़ने पर उत्तराखंड सरकार ने इस मामले पर बैठक की और इसकी जांच कराने का निर्णय लिया है।
Akhilesh Yadav built Kedareshwar temple in Etawah
जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के इटावा में लगभग दो एकड़ भूमि पर 55 करोड़ की लागत से केदारेश्वर मंदिर का निर्माण किया है। इस मंदिर का निर्माण कार्य 2020 में आरंभ हुआ था। इस मंदिर की संरचना बिल्कुल उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर के समान है। अखिलेश यादव ने मंदिर के निर्माण के लिए तिरुवल्लुवर से कारीगरों को बुलाया था। इस मंदिर में लगभग 7 फीट के शालिग्राम की शिला स्थापित की गई है। इस मंदिर के निर्माण में कई विशेष तकनीकों का उपयोग किया गया है। इस मंदिर की रंग रोगन से लेकर मंदिर की गुंबद तक सब कुछ केदारनाथ मंदिर के समान की गई है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर साझा किया मंदिर का वीडियो
आपको बता दें कि धामी कैबिनेट ने 18 जुलाई 2024 को यह प्रस्ताव पारित किया था कि देश के किसी भी स्थान पर उत्तराखंड चारधाम के नाम से या उसी शैली में किसी भी मंदिर का निर्माण नहीं किया जाएगा। इसके लिए उत्तराखंड सरकार ने सभी राज्यों को पत्र भी भेजा था। यह भी बताया था कि यदि कोई ऐसा कार्य करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन उसके बावजूद अखिलेश यादव ने यूपी के इटावा में उत्तराखंड के केदारनाथ के समान मंदिर का निर्माण कराया है। अखिलेश यादव ने मंदिर का वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया है। हालांकि, इस मामले में उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन मंदिर का वीडियो डालते ही उत्तराखंड में हंगामा मच गया है. केदारनाथ धाम के पुरोहितों और बीजेपी की विरोधी पार्टियाँ इस मंदिर के निर्माण का जमकर विरोध कर रहे हैं. प्रदेश में विवाद बढ़ने के बाद उत्तराखंड सरकार ने इस मामले की जांच करने की बात कही है।
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विरोध को बेतुका करार दिया
भाजपा के वरिष्ठ नेता, हरिद्वार सांसद और पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस मामले में बयान देते हुए इस प्रकार के विरोध को बेतुका करार दिया है। उन्होंने कहा कि मंदिरों की नकल या हूबहू मंदिर पहले भी कई स्थानों पर बनाए गए हैं, इसका विरोध नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि केदारनाथ एक धाम है और धाम केवल एक ही हो सकता है। चाहे उसकी शैली की नकल कोई भी कितनी बार ही क्यों ना कर ले। इसलिए राजनेताओं को इस मामले में अधिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए और यह मामला साधु संतों और तीर्थ पुरोहितों को सौंपना चाहिए।
तीर्थ पुरोहितों ने दी आंदोलन की चेतावनी
तीर्थ पुरोहितों ने कहा है कि अखिलेश यादव ने आज तक कभी केदारनाथ धाम की यात्रा नहीं की। लेकिन उन्होंने वहां के मंदिर की नकल कर उत्तर प्रदेश में धार्मिक राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की है। तीर्थ पुरोहितों ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से मांग की है कि इटावा में बने मंदिर का नाम, डिज़ाइन और रंग-रूप तुरंत बदला जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो पूरे उत्तराखंड और देशभर में तीर्थ पुरोहित बड़ा आंदोलन करेंगे। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं को लेकर लोगों की संवेदनशीलता लगातार बढ़ रही है। अब देखना होगा कि योगी सरकार और बीकेटीसी इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।