उत्तराखंड पिथौरागढ़Tanakpur Pithoragarh National Highway to built All Weather

उत्तराखंड: भूस्खलन-मुक्त बनेगा टनकपुर-पिथौरागढ़ नेशनल हाईवे, अगले डेढ़ साल में ऐसे होगा तैयार

टनकपुर-पिथौरागढ़ सड़क के 90 प्रतिशत ढलान स्थिर हो जाएंगे। इससे सड़क को मानसून के दौरान बार-बार होने वाले भूस्खलन से बचाया जा सकेगा।

Tanakpur Pithoragarh National Highway: Tanakpur Pithoragarh National Highway to built All Weather
Image: Tanakpur Pithoragarh National Highway to built All Weather (Source: Social Media)

पिथौरागढ़: उत्तराखंड में वर्षों पुरानी टनकपुर-पिथौरागढ़ सड़क को भूस्खलन-रहित बनाने के प्रयास चल रहे हैं। काम कर रहे टीएसडीसी विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क अगले डेढ़ साल तक भूस्खलन-मुक्त हो जाएगी।

Tanakpur Pithoragarh National Highway to built All Weather

राष्ट्रीय राजमार्ग-9 के वर्तमान में चल रहे काम के लिए विशेषज्ञ तकनीकी सलाहकार समूह बनाया गया है, इसके अध्यक्ष नीरज अग्रवाल ने कहा कि कार्य पूरा होने के बाद टनकपुर-पिथौरागढ़ सड़क के 90 प्रतिशत ढलान स्थिर हो जाएंगे। इससे सड़क को मानसून के दौरान बार-बार होने वाले भूस्खलन से बचाया जा सकेगा। स्वाला के 150 मीटर से अधिक क्षेत्र में मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए उपचार की आवश्यकता है। अग्रवाल ने कहा कि चारधाम की सभी सड़कों का ढलान कम करने के लिए मार्च 2021 से टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (टीएसडीसी) सर्वे करेगा. अग्रवाल ने कहा कि पहले उन्हें इस सड़क पर ढह रहे 60 क्षेत्रों पर कार्रवाई करने की सलाह दी गई थी, लेकिन इस मानसून के दौरान 18 नए क्षेत्रों में कटाव शुरू हो गया, जिससे यह संख्या 78 हो गई है। नेशनल हाइवे-9 पर भूस्खलन इलाकों में निरीक्षणऔर सलाह दे रहे THDC के एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले डेढ़ सालों में यह मार्ग भूस्खलन (Landslide) से मुक्त हो सकता है।

चार धाम को जोड़ने वाली परियोजना का हिस्सा

पाठकों को बता दें कि सन 2016 में टनकपुर-पिथौरागढ़ खंड को केंद्र सरकार से मंजूरी मिली थी, जो कि उत्तराखंड में 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 'चार धाम' को जोड़ने वाली बड़ी सड़क परियोजना का हिस्सा है। हालांकि NH-9 के मुख्य इंजीनियर दयानंद के अनुसार इस बार बारिश का नया पैटर्न होने के कारण जब सड़क परियोजना रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया गया था तो उस समय नए भूस्खलन संवेदनशील क्षेत्रों के विकसित होने का कोई अनुमान नहीं था। इंजीनियरों ने बताया कि मानसून के समय में बारिश अधिक तेज और सघन होने के कारण आगे आने वाले समय में नए संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों के विकसित होने की भी संभावना है।