धन्य है देवभूमि की ये बेटी, विश्व की सबसे ऊंची सड़क पर बाइक चलाकर बनाया रिकॉर्ड

धन्य है देवभूमि की ये बेटी, विश्व की सबसे ऊंची सड़क पर बाइक चलाकर बनाया रिकॉर्ड

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कमाल की बेटियां हैं उत्तराखंड की, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए सपनों से ही आगे दौड़ने लगी हैं। पहाड़ की बेटी सुचेता सती को बारम्बार शुभकामनाएं दें क्योंकि इस बेटी ने इतिहास रच दिया है। उत्तराखंड की पहली बेटी जिसने विश्व की सबसे ऊंची मोटरेबल रोड पर बाइक से उड़ान भरी है। खारदुंग ला दर्रा टॉप पर बाइक चलाने का रिकॉर्ड अब सुचेता सती के नाम है। खारदुंग ला दर्रा हिमालय में स्थित एक दर्रा है जो समुद्र तल से 18,380 फीट की ऊंचाई पर है। ये भारत और विश्व का सबसे ऊंचा दर्रा है, जहां मोटरेबल रोड है। यहां चमोली जिले के जोशीमठ की रहने वाली सुचेता सती ने इतिहास रचा है। महेश सती जी की दो बेटियां हैं। इनमें से बड़ी बेटी का नाम है सुचेता सती। बाइक से सुचेता को इतना प्यार है कि सिर्फ 14 साल की उम्र में ही इसे चलाना सीख लिया।

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आज अपने सपने को जुनून में बदलकर सुचेता सती के नाम उत्तराखंड की पहली बाइकर्स गर्ल का खिताब है। अब जरा ये भी जान लीजिए कि सुचेता ने ये सफर कैसे मुश्किल हालातों में पूरा किया। सुचेता सती ने सबसे पहले तो ये साबित कर दिया है कि उत्तराखंड की बेटियों के लिए कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं है। खारदुंग ला टॉप पर जाने वाली सुचेता सती सबसे कम उम्र की महिला बाइकर हैं। इससे पहले दिल्ली की 20 वर्षीय रिया खारदुंग ला दर्रा टॉप पर गई थीं। दरअसल आईएएस एकेडमी के डीएस रावत की पहल पर 10 जून को देहरादून से 11 सदस्यों की टीम 5 हजार किलोमीटर दूर खारदुंगला टॉप के लिए निकली थी। खास बात ये है कि इस टीम में 10 लड़कों के साथ सुचेता अकेली सबसे कम उम्र की लड़की थी। 10 जून को इस दल 650 किमी की दूरी तय की और 12 घंटे में पटनी टॉप पहुंचे।

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इसके बाद दूसरे दिन ये टीम करगिल के लिए रवाना हुई थी। इसके बाद बारी खारदुंग ला दर्रा टॉपग की थी और टीम को ये हर हाल में पूरा करना था। 18 हजार 380 फीट की दूरी तय कर 15 जून को ये टीम अपने मुकाम पर पहुंची। लक्ष्य हासिल हुआ तो 22 जून को मनाली होते हुए ये टीम वापस देहरादून पहुंची। रास्ते में ना जाने कितनी मुश्किलं को पार कर ये दल आगे बढ़ता रहा। केलांग, रोहतांग दर्रा, बारलाचला, लांगलांगल, पांग, सर्चू जैसी जगहों से होकर ये दल आगे बढ़ा। हर दिन 400 किलोमीटर बाइक चलाना इतना आसान नहीं होता। कड़ाके की ठंड में खड़ी चढ़ाई पर बाइक चलाना तो और भी ज्यादा मुश्किल था। सुचेता सती देहरादून के डीएवी की बीकॉम प्रथम वर्ष की छात्रा हैं। क्या आप जानते हैं कि इस बेटी का अगला लक्ष्य क्या है। इस बेटी का अगला लक्ष्य कश्मीर से कन्याकुमारी तक बाइक से सफर करने का है।


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