गढ़वाल राइफल को मिला दुनिया का सबसे बड़ा सम्मान, संयुक्त राष्ट्र संघ ने किया सलाम

गढ़वाल राइफल को मिला दुनिया का सबसे बड़ा सम्मान, संयुक्त राष्ट्र संघ ने किया सलाम

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ये गढ़वाल राइफल है, जिसकी तारीफ अब देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में हो रही है। दुनिया के सबसे बड़े सम्मानों में से एक सम्मान अब गढ़वाल राइफल के नाम हो चला है। जी हां यूनाइटेड नेशंस की तरफ से गढ़वाल राइफल को निस्वार्थ सेवाभाव के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ मेडल से सम्मानित किया गया है। दक्षिण सूडान में शांति बहाल करने के लिए गढ़वाल राइफल के वीरों को ये सम्मान दिया गया है। हिंसा से त्रस्त पूर्वी अफ्रीकी देश दक्षिण सूडान में शांति कायम करने और संयुक्त राष्ट्र मिशन (यूएनएमआईएसएस) का साथ देने पर अब गढ़वाल राइफल के शांतिदूतों की सराहना हो रही है। दरअसल दक्षिण सूडान में हिंसा के चलते नागरिकों को अपना मुल्क छोड़कर जाना पड़ रहा था। हिंसा की वजह से यहां की अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह से तबाह हो गई थी।

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संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा दक्षिण सूडान में शांति बहाल करने की कोशिश की जा रही थी। इसमें भारतीय सेना से भी मदद मांगी गई थी। भारतीय सेना ने गढ़वाल राइफल के करीब 2300 सैन्‍य कर्मियों को वहां भेजा गया था। सातवीं गढ़वाल राइफल्स इन्फैंट्री बटालियन के दल ने यहां गजब धौर्य के साथ काम किया और साबित कर दिया कि वो वास्तव में शांतिदूत भी है। ये गढ़वाल राइफल्स और उसकी यूनिट के लिए गौरव की बात है क्योंकि गढ़वाल क्षेत्र के सैनिकों को पहली बार दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में तैनात करने के लिए नामित किया गया था। सैनिकों का ये दल संवेदनशील जोंगलेई राज्य में चलाए जा रहे अभियान के संचालन और नियंत्रण का काम देख रहा था। इसकी एक इकाई बॉर काउंटी के जुबा में तैनात थी, जो इसका मुख्यालय था।

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इन सैनिकों की एक टुकड़ी विमानों से जुड़े देख-रेख के लिए पिबोर काउंटी में भी तैनात की गई थी। पिबोर में सशस्त्र संघर्ष और जातीय हिंसा लगातार जारी थी। दक्षिण सूडान में भारतीय शांति सैनिकों को वहां शांति बहाली के लिए चलाए जा रहे संयुक्‍त राष्‍ट्र के अभियान के तहत चैप्‍टर 7 की व्‍यवस्‍थाओं के तहत तैनात किया गया। इस मिशन को गढ़वाल राइफल के जवानों ने बखूबी निभाया और साबित कर दिया कि इस वक्त वो देश ही नहीं बल्कि दुनिया की सबसे बेहतर बटालियन है। गढ़वाल राइफल के वीरों ने हर बार किसी काम को पूरा करके ही दम लिया है और इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। इस काम के लिए गढ़वाल राइफल को यूनाइटेड नेशन मेडल से सम्मानित किया गया है। इस वक्त हम भी चाहेंगे कि आप जी भर के ये खबर शेयर करें और दुनिया को बताएं कि पहाड़ के वीर जवान किसी से कम नहीं।

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