पहाड़ का पीड़ा देखकर रोना आया, तो इस युवा ने अपने दम पर संवारी गांव की तस्वीर

पहाड़ का पीड़ा देखकर रोना आया, तो इस युवा ने अपने दम पर संवारी गांव की तस्वीर

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कुछ कहानियां जोश जगाती हैं, कुछ कहानियां दिल में कुछ कर गुजरने की लौ जगाती हैं, कुछ कहानियां उम्मीद और भरोसा देती हैं तो कुछ कहानियां किसी के लिए प्रेरणा बन जाती हैं। हमारा पहाड़ भी ऐसी बेमिसाल कहानियों से भरा है। आज हम आपको जो कहानी बताने जा रहे हैं, वो भी एक ऐसे शख्स की कहानी है, जो पहाड़ में सिर्फ एक यात्री बनकर घूमने आया था लेकिन पहाड़ का दर्द उसे वापस खींच लाया। आनंद शंकर आज उत्तरकाशी के कलप गांव के लोगों के लिए किसी देवदूत से कम नहीं हैं। साल 2006 में आनंद शंकर कलप गांव में घूमने आए थे। उन्होंने देखा कि अपार खूबसूरती से भरे इस गांव में संभावनाओं की कोई कमी नहीं हैं। खैर उस वक्त उन्होंने ये बात अपने दिल में रखी और वो वापस अपने शहर कोयम्बटूर चले गए।

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2013 में आनंद शंकर का फिर उत्तराखंड घूमने का मन हुआ, तो वो वापस आकर कलप गांव में ही रुके। लेकिन इस बार नज़ारा कुछ और था। साल साल बाद भी इस गांव की हालत सुधरी नहीं बल्कि और भी खराब हो चुकी थी। ये देखकर आनंद शंकर का दिल भर आया। इसी दौरान आनंद शंकर की मुलाकात एक बुजुर्ग महिला से हुई, जिनकी तबीयत कई दिनों से नासाज़ थी। आनंद शंकर ने उन्हें दवा लाकर दी। बुजुर्ग महिला जब ठीक हुईं तो आनंद शंकर के पैर छूने लगे। इस संवेदना और प्यार से आनंद शंकर पूरी तरह से हिल गए। तुरंत फैसला किया कि अब कुछ भी हो जाए, इस गांव की हालत सुधार कर ही वापस जाऊंगा। आनंद शंकर ने सबसे पहले इस गांव में हेल्थ कैम्प लगाया और लोगों की सेहत का पता किया। धीरे धीरे लोगों की सेहत में सुधार का बंदोबस्त किया जाने लगा था।

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इसके बाद आनंद ने गांव के ही एक स्कूल को सुधारने का काम किया, जिसकी हालत बेहद खराब थी। अब सवाल था रोजगार का, तो इसका विकल्प भी आनंद शंकर ने ढूंढ लिया। उन्होंने बैंगलुरु की अपनी एक महिला मित्र को बुलाया और उन्होंने यहां की महिलाओं को ऑर्गेनिक रंगाई और कपड़े बुनने का काम सिखाया। आनंद को साहसिक कामों के बारे में पता था तो उन्होंने यहां के लोगों को ट्रैकिंग में टैंटिंग और गाइड बनने की ट्रेनिंग दे दी। इसके बाद आनंद ने इस गांव के घरों को होम स्टे के तौर पर तैयार कराया। आज आप इस गांव में जाकर देखिए। एकदम अलग और रौनक से भरा ये गांव देशभर के यात्रियों का ध्यान अपनी तरफ खींच रहा है। आज आप आपसे ये भी कहना चाहते हैं कि आनंद शंकर पर एक बेहतरीन वीडियो भी तैयार किया गया है। जिसे देखकर आप भी अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

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देश के बड़े रेडियो चैनल में शुमार किए जाने वाले Red FM के आर जे काव्य आजकल पहाड़ की इन कहानियों को बड़ी खूबसूरती से पेश कर रहे हैं। आर जे काव्य खुद बागेश्वर के रहने वाले हैं और पहाड़ों की खूबसूरत, दर्द, संवेदनाओं को समझते हैं। इसलिए उन्होंने एक सीरीज शुरू की है, जिसका नाम है ‘एक पहाड़ी ऐसा भी’। इसी सीरीज के जरिए हमें आनंद शेखर की ये कहानी मिली है। धन्यवाद Red FM और RJ काव्य का, देखिए आनंद शेखर पर बनी ये शानदार कहानी।


Uttarakhand News: Ek padadi aisa bhi story based on anand shankar

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