उत्तराखंड का एक और सपूत सीमा पर शहीद, 21 साल की उम्र में दिया सर्वोच्च बलिदान

उत्तराखंड का एक और सपूत सीमा पर शहीद, 21 साल की उम्र में दिया सर्वोच्च बलिदान

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जरा सोचिए 21 साल क एक लड़का जिसके लिए उसके परिवार वालों ने कई ख्वाब सजाए थे, वो वीर मातृभूमि की रक्षा करते करते विदा हो गया। सरहद पर अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले इस वीर सपूत को सलाम है लेकिन सवाल ये है कि चुप कब तक बैठा जाएगा ? कब पाकिस्तान को सही और मजबूत जवाब मिलेगा ? आखिर क्यों उत्तराखंड में आए दिन ये सुनने को मिलता है कि कोई सीमा पर शहीद हो गया। ये बात सच है कि पाकिस्तान बाज़ नहीं आ रहा और देश के जवान अपनी जान पर खेल रहे हैं। एक बार फिर से उत्तराखंड का एक और लाल मातृभूमि की बलिवेदी पर चढ़ा है। ईद के पाक मौके पर नापाक पाकिस्तान चुप नहीं बैठा और सीमा पार से गोलियों की बरसात कर दी। पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में सीजफायर का उल्लंघन किया गया।

इस हमले में ऋषिकेश के रहने वाले विकास गुरुंग शहीद हो गए हैं। इस बात की खबर परिवारवालों को दे दी गई है। इसके बाद से विकास गुरुंग के घर में मातम पसरा हुआ है। विकास गुरुंग के पिता का नाम रमेश गुरुंग है। रमेश गुरुंग सेना से रिटार्ड हुए हैं। उन्हें सेना के अधिकारियों ने फोन करके घटना की सूचना दी। साल 2015 में विकास गुरुंग सेना में भर्ती हुए थे। विकास गुरुंग का छोटा भाई निरंजन गुरुंग भी भारतीय सेना में ही है। सीजफायर के दौरान मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हिम्मत से डटे जांबाज विकास गुरुंग ने अपनी जान की बाजी लगा दी। ऋषिकेश के गुमानीवाला निवासी विकास गुरुंग एक वीर सिपाही थे। विकास 2/1 गोरखा राइफल में सिपाही के पद पर तैनात थे। आज सुबह ही शहीद विकास के घर में मच गया कोहराम मच गया।

शनिवार सुबह नौ बजे बजे सेना मुख्यालय से विकास के परिजनों को उनके शहीद होने की सूचना मिली। जिसके बाद घर में कोहराम मच गया। इसके बाद से लोग सांत्वना देने के लिए उनके घर पहुंच रहे हैं। आपको याद होगा कि दो दिन पहले ही उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के मानवेंद्र सिंह रावत भी सीमा पर लड़ते लड़ते शहीद हुए। इस साल अब तक ना जाने कितने ऐसे लाडले सीमा पर अपनी जान गंवा चुके हैं। ऐसे में वक्त आ गया है कि सरकार कोई बड़ा फैसला ले, वरना यूं ही सैकड़ों नौजवान हर साल पकिस्तान की करतूतों से मारे जाएंगे। 5 दिन के भीतर ही ये दूसरा मौका है जब उत्तराखंड की धरती का जवान मातृभूमि की बलिवेदी पर चढ़ा है। धन्य है देवभूमि के ऐसे वीर जवान, जिन्होंने अपनी वीरता से देश की शौर्यगाथा में नया इतिहास लिखा है।


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