देवभूमि में अपने गांव पहुंचे जुबिन नौटियाल, मन्नत पूरी होने पर देवता को चढ़ाया छत्र

देवभूमि में अपने गांव पहुंचे जुबिन नौटियाल, मन्नत पूरी होने पर देवता को चढ़ाया छत्र

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बॉलीवुड सिंगर जुबिन नौटियाल के बारे में आज कौन नहीं जानता। आज अरिजित सिंह जैसे बड़े सिंगर को कोई अगर बलीवुड में टक्कर दे रहा है, तो वो बेशक जुबिन नौटियाल ही हैं। अपनी मखमली आवाज से लाखों दिलों पर राज करने वाले जुबिन नौटियाल आध्यात्मिक प्रृवत्ति के हैं। उत्तराखंड के जौनसार में जुबिन नौटियाल का घर है और उनकी पढ़ाई लिखाई देहरादून से हुई है। महसू देवता के भक्त जुबिन नौटियाल अपने गांव आए और महासू देवता को 6 लाख रुपये का सोने का छत्र चढ़ाया। जुबिन आज भी कहते हैं कि महासू देवता की कृपा से बॉलीवुड के बड़े गायक बने हैं और ऐसे में वो अपने रीति-रिवाज और अपनी संस्सकृति को कभी भी नहीं भूल सकते। जुबिन के पिता पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष देहरादून रामशरण नौटियाल हैं और माता का नाम नीना नौटियाल है।

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महासू मंदिर में जुबिन नौटियाल ने रात्रि जागरण के बाद मंदिर में सुबह विशेष पूजा अर्चना की। इसके बाद उन्होंने भगवान महासू को 6 लाख रुपये का सोने का छत्र चढ़ाया। इस दौरान जुबिन नौटियाल के कई प्रशंसक हनोल पहुंचे और दुबिन से एक गीत गाने की भी डिमांड की। जुबिन ने अपने फैंस को निराश ना करते हुए एक बेहतरीन गीत भी गाया। जुबिन हमेशा से कहते आए हैं कि वो कहीं भी रहें लेकिन उत्तराखंड के लिए उनके दिल में बेहद प्यार है। उन्हें जब भी मौका मिलता है, वो उत्तराखंड आते हैं और महासू देवता के दर्शन करना नहीं भूलते। महासू देवता का मंदिर देहरादून से 190 किलोमीटर दूर स्थित स्थित है। इसके बारे में एक खास बात ये है कि यहां हर साल राष्ट्रपति भवन से नमक आता है। कहा जाता है कि यहां मनुष्य के हर कर्म का हिसाब होता है।

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इस मंदिर के गर्भ गृह में जाने पर लोगों की पाबंदी है। सिर्फ मंदिर का पुजारी ही मंदिर में प्रवेश कर सकता है। मंदिर में एक अखंड ज्योति दशकों से जलती आ रही है। महासू देवता' एक नहीं चार देवताओं का नाम है। महासू शब्द 'महादेव' का अपभ्रंश है। यहां बासिक महासू, पबासिक महासू, बूठिया महासू और चालदा महासू हैं, जो कि भगवान शंकर के रूप कहे जाते हैं। महासू देवता को न्याय के देवता भी कहा जाता है। कहा जाता है कि महासू देवता का मंदिर जिस गांव में बना है. उस गांव का नाम हुना भट्ट ब्राह्मण के नाम पर रखा गया है। इससे पहले इस जगह को चकरपुर नाम से जाना जाता था। कुल मिलाकर कहें तो जुबिन नौटियाल भी इस मंदिर के बड़े भक्त हैं और उनकी महासू देवता पर अपार आस्था है। जुबिन ने कहा महासू देवता की कृपा से उन्हें गायकी के क्षेत्र में बड़ी सफलता मिली।


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