जिसने उत्तराखंड का नाम दुनिया में रोशन किया, अब नहीं रहा वो महान कलाकार...नमन

जिसने उत्तराखंड का नाम दुनिया में रोशन किया, अब नहीं रहा वो महान कलाकार...नमन

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यूनेस्को से गोल्ड मेडल हासिल करमे वाले...एशियन कल्चरल सेंटर फॉर यूनेस्को अवॉर्ड, राजस्थान ललित कला एकेडमी अवॉर्ड, आल इंडिया अवार्ड, ललित कला एकेडमी अवॉर्ड, राजीव गांधी एक्सीलेंस अवार्ड, फेलोशिप फॉर म्यूरल डिजाइन बाई द ब्रिटिश ऑर्ट्स काउंसिल जैसे बड़े सम्मानों से सम्मनित सुरेंद्र पाल जोशी अब हमारे बीच नहीं रहे। उत्तराखंड की लोक संस्कृति को दुनियाभर में पहुचाने वाले एक महान कलाकार ने अपने जीवन की आखिरी सांस ले ली है। 61 साल की उम्र में उत्तराखंड के इस सपूत ने दुनिया को अलविदा कह दिया। ये महान कलाकार मूलरूप से अल्मोड़ा के रहने वाले थे। अब वो देहरादून के मनियारवाला में रह रहे थे। सुरेंद्र पाल जोशी ने किस तरह से देवभूमि की संस्कृति को दुनियाभर में कला के जरिए पहुंचाया, जरा ये बात भी जान लीजिए।

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उत्तराखंड की पहली सरकारी आर्ट गैलरी को तैयार करने का श्रेय भी सुरेंद्र पुाल जोशी को ही जाता है। उनके मार्गदर्शन में घंटाघर स्थित MDDA कॉम्प्लेक्स में उत्तराखंड का पहला आर्ट म्यूजियम और आर्ट गैलरी तैयार की गई थी। करीब 6 महीने पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस आर्ट गैलरी का उद्घाटन किया था। इस गैलरी में सुरेंद्र पाल जोशी द्वारा कुछ बेमिसाल कलाकृतियां रखी गई हैं। यहां आपको हजारों सेफ्टीपिन से बने दमाऊं-ढोल मिलेंगे मिलेंगे। इसके अलावा आपको यहां एक लाख सेफ्टीपिन से बना हेलीकॉप्टर और 70 हजार सेफ्टीपिन से बना हेलमेट भी दिखेगा। साल 1997 में ब्रिटेन से फेलोशिप मिलने के बाद सुरेंद्र पाल जोशी ने म्यूरल पर काफी काम किया। साल 2000 के बाद से उन्होंने पेंटिंग पर ध्यान देना शुरू किया।

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वो पेंटिंग में लगातार नए प्रयोग करते थे और इसी वजह से कई देशों में सम्मानित किए गए। सुरेंद्र पाल जोशी अपने पीछे पत्नी संगीता जोशी, बेटा परिचय जोशी और बेटी तान्या जोशी को छोड़ गए हैं। साल 1955 में देहरादून के गुनियालगांव में सुरेंद्र पाल जोशी का जन्म हुआ था। ऋषिकेश से बीए करने के बाद वो 1980 में लखनऊ के आ‌र्टस एंड क्राफ्ट्स कॉलेज चले गए। इसके बाद साल 1988 में वो राजस्थान कॉलेज ऑफ आर्ट जयपुर की फाइन आर्ट फैकल्टी में सहायक शिक्षक बन गए। 1997 में उन्हें फैलोशिप मिली और इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन में म्यूरल आर्ट पर काम किया। साल 2008 में उन्होंने वीआरएस लिया और नए सिरे से कला का सफर शुरू किया। सुरेन्द्र पाल जोशी के निधन पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शान्ति तथा उनके परिजनों को दुःख की इस घड़ी में सांत्वना प्रदान करने की ईश्वर से कामना की है। जोशी की अस्वस्थता के दौरान उनके उपचार के लिये मुख्यमंत्री द्वारा 04 लाख रूपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई थी।


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