रुद्रप्रयाग जिले का सपूत शहीद हुआ, दो आतंकियों को मारकर चला गया

रुद्रप्रयाग जिले का सपूत शहीद हुआ, दो आतंकियों को मारकर चला गया

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उत्तराखंड वीर सपूतों के वीरता की दास्तान सबसे अलग है। अपने प्राणों की परवाह किए बिना देश की रक्षा के लिए कुर्बान हो जाना उत्तराखंड के वीर जवानों का जुनून है। हाल ही में दीपक नैनवाल शहीद हुई तो पूरे ऊत्तराखंड से उनके परिवार की मदद के लिए हाथ उठे थे। अब दीपक नैनवाल के बाद रुद्रप्रयाग के सुदूर गांव कबिल्ठा के रहने वाले मानवेंद्र सिंह के शहीद होने की खबर आ रही है। जी हां बताया जा रहा है कि जम्मू कश्मीर के बांदीपुरा में गुरुवार सुबह भारतीय सेना और आंतकियों के बीच मुठभेड़ हुई। ठबारतीय सेना को खबर मिली थी कि उस पार से कुछ आतंकी घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद जवानों की एक टोली आतंकियों को खत्म करने के लिए चल पड़ी। दोनों तरफ से अंधाधुंध फायरिंग हुई और मानवेंद्र सिंह ने वीरता का परिचय दिया।

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मानवेंद्र सिंह ने अदम्य साहस दिखाते हुए दो आतंकियों को ढेर कर दिया। बताया जा रहा है कि इस दौरान एक गोली उनको लगी और वो जमीन पर गिर पड़े। मानवेंद्र का गांव कबिल्ठा पड़ता है। कबिल्ठा गांव के लिए गुप्तकाशी से पहले एक रास्ता जाता है। कुछ देर पहाड़ की शांत वादियों मे सफर करने के बाद कालीमठ के बाद कबिल्ठा गांव पड़ता है। मानवेंद्र के शहीद होने की सूचना है लेकिन अभी जिला प्रशासन इसकी कोई पुष्टि नहीं कर रहा है।उधर सूत्रों का कहना है कि सेना के जवान शहीद के पार्थिव शरीर के लेकर वहां से रवाना हो गए हैं। शाम तक शहीद का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचने की संभावना है। सवाल ये है कि आखिर कब तक उत्तराखंड के वीर सपूत इस तरह से शहीद होते रहेंगे। क्या वक्त नहीं आ गया है कि गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय को इन जवानों के परिवारों के बारे में कुछ सोचना चाहिए ?


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