देवभूमि में जब भगवान नृसिंग की कलाई टूटेगी, तो अपना स्थान बदलेंगे बदरीनाथ !

देवभूमि में जब भगवान नृसिंग की कलाई टूटेगी, तो अपना स्थान बदलेंगे बदरीनाथ !

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देवभूमि में भगवान नरसिंह को समर्पित है ये विशाल मंदिर। पहाड़ की खूबसूरत वादियों के बीच उत्तराखंड के जोशीमठ में स्थित है नरसिंह भगवान का ये जागृत मंदिर विज्ञान के युग में विज्ञान को ही चुनौती देता नजर आता है। आखिर क्या वजह है कि इस मंदिर को भगवान नरसिंह का जागृत रूप कहा जाता है। आइए इस बारे में हम आपको कुछ खास जानकारी दे देते हैं। इस मंदिर में सबसे बड़ा आकर्षण का विषय है यहां मौजूद भगवान नरसिंह की मूर्ति। ये मूर्ति दिन प्रति दिन छोटी होती जा रही है यानी सिकुड़ रही है। खास बात ये है भगवान नरसिंह की मूर्ति की बायीं कलाई पतली है और कहा जाता है कि ये हर दिन पतली होती जा रही है। कहा जाता है कि जिस दिन प्रतिमा की कलाई टूटकर गिरेगी, तो ये संकेत होगा कि बदरीनाथ धाम को स्थान बदलना है। इस बारे में कुछ खास बातें जानिए।

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ये बात तो आप जानते हैं 'श्रीबदरी नारायण', 'आदि बदरी', 'वृद्ध बदरी', 'योग-ध्यान बदरी' और 'भविष्य बदरी' को ही 'पंच बदरी' कहा गया है। मान्यताओं की मानें तो इस मंदिर को नारसिंघ बद्री या नरसिम्हा बद्री भी कहा जाता है | नरसिंह मंदिर के बारे में कहा जाता कि ये मंदिर, संत बद्री नाथ का घर हुआ करता था । कहा जाता है कि आदिगुरु शंकराचार्य ने स्वयं इस स्थान पर भगवान नरसिंह की शालिग्राम की स्थापना की थी | ये मूर्ति 10 इंच(25से.मी) है । भगवान नृसिंह एक कमल पर विराजमान हैं | भगवान नरसिंह के साथ इस मंदिर में बद्रीनारायण , उद्धव और कुबेर के विग्रह भी स्थापित है। इस मंदिर में स्‍थापित भगवान नरसिंह की प्रसिद्ध मूर्ति दिन प्रति दिन सिकुडती जा रही है । मूर्ति की बायीं कलाई पतली है और हर दिन पतली ही होती जा रही है । ऐसी मान्यता है कि जिस दिन नृसिंह स्वामी जी की यह कलाई टूट कर गिर जाएगी, तब ‘भविष्य बद्री’ में नए बद्रीनाथ भगवान की स्थापना होगी।

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अब आपको भविष्य बद्री के बारे में भी बता देते हैं। इसके बारे में कहा जाता है कि यहां मंदिर के पास ही एक शिला मौजूद है। इस शिला को अगर आप ध्यान से देखेंगे तो आपको इसमें भगवान की आधी आकृति ही नजर आएगी। कहा जाता है कि जिस दिन ये आकृति साफ साफ दिखने लगेगी, या फिर यूं कहें तो पूर्ण रूप ले लेगी, उस दिन भगवान बद्रीनाथ यहां विराजमान होंगे। भविष्य बदरी के पुजारी कहते हैं कि धीरे-धीरे इस शिला पर भगवान की दिव्य आकृति उभरती जा रही है। इसके साथ ही कहा जा रहा है कि जो हमारे शास्त्रों और पुराणों में लिखा गया है, वो बात भी सत्य होती जा रही है। भविश्य बद्री जाने के लिए आपको जोशीमठ से तपोवन की तरफ जाना होगा। यहां से आप रिंगी होते हुए भविष्य बद्री जा सकते हैं।


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