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Image: Aerostat balloon technology launched in uttarakhand

Video: उत्तराखंड बना देश का ऐसा पहला राज्य, जहां पहाड़ों का मददगार बनेगा हाईटेक बैलून

Video: उत्तराखंड बना देश का ऐसा पहला राज्य, जहां पहाड़ों का मददगार बनेगा हाईटेक बैलून

पहाड़..यानी सुविधाओं से दूर और आपदा की मार से ग्रस्त क्षेत्र। अगर आप पहाड़ों में रहते हैं तो आपदा का हर दौर आपको याद होगा। आपदा आते ही सबसे पहला काम होता है, इसकी सूचना जल्द से जल्द अधिकारियों तक पहुंचाना। पहाड़ों में आने वाली आपदा इतनी विकराल होती है कि मोबाइल नेटवर्क, बिजली कई दिनों तक गुल रहते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लोग तरसते रहते हैं। ऐसे में इसका विकल्प क्या है ? कैसे लोगों तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जाए ? कैसे लोगों को इंटरनेट से कनेक्ट किया जाए ? और कैसे एक ऐसा सिस्टम तैयार किया जाए, जहां इंटरनेट के लिए किसी टॉवर की जरूरत ना पड़े ? आखिरकार ये काम हो गया है और खास बात ये है कि उत्तराखंड ऐसा कारनामा करने वाला पहला राज्य बन गया है। जी हां 6 जून यानी शुक्रवार को उत्तराखण्ड में इंटरनेट तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी शुरूआत की गई।

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आईटी पार्क, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में एरोस्टेट तकनीक बैलून को सफलतापूर्वक लांन्च किया गा। ITDA द्वारा IIT मुम्बई के सहयोग से देश में पहली बार एरोस्टेट का अनोखा प्रयोग किया गया और इसे तकनीकी तौर पर सम्भव किया।उत्तराखण्ड में गांव दूर-दूर स्थित हैं। बिखरी हुई आबादियों तक इंटरनेट तकनीक उपलब्ध करवाना प्राईवेट कम्पनियों के लिए फायदेमंद नहीं रहता है। ऐसी स्थिति में बैलून तकनीक से कम लागत में ग्रामीण क्षेत्रों तक बैलून तकनीक से इंटरनेट की सुविधा पहुंचाई जाएगी। उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां एरोस्टेट का सफल प्रयोग किया गया है। एरोस्टेट बैलून एक आकाशीय प्लेटफार्म है जिसमें वातावरण में उपलब्ध गैस से भी हल्की गैस भरकर आकाश में ऊंचे उठाया जाता है।

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बैलून को एक रस्सी की सहायता से धरातल से जोड़ा जाता है, जिससे वो विभिन्न संयन्त्रों के साथ काफी वक्त के लिए बिना ईंधन के वायुमण्डल में लहराता है। बैलून के न्यूनतम कंपन की गुणवत्ता के चलते इससे संचार, आकाशीय निगरानी, जलवायु निगरानी जैसे कई काम किए जा सकते हैं। खास बात ये है कि बैलून को किसी गाड़ी में भी स्थापित कर आवश्यकता के अनुसार एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाकर कम समय में क्रियाशील किया जा सकता है। आपातकालीन परिस्थितियों में इसमें लगे उपकरणों को सौर ऊर्जा के माध्यम से तकनीकी का उपयोग किया जा सकता है। एक बैलून के माध्यम से प्रभावित अधिकतम क्षेत्र को कवर किया जा सकता है, जिसके अन्तर्गत 05 एमबीपीएस तक डाटा स्पीड मिलती है। इसकी और भी खास बातें हैं।

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इसके माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों में संचार व्यवस्था बनाने, आपदाग्रस्त क्षेत्रों में राहत कार्यो के समय संचार व्यवस्था, आकाशीय निगरानी के माध्यम से दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों की खोज में भी सुविधा होगी। उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि एरोस्टेट बैलून के लिए उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जो कि वर्तमान में सूचना और इंटरनेट तकनीक से अछूते हैं। ऐसे स्थानों को बैलून तकनीक के माध्यम से इंटरनेट की उपलब्धता कराई जाएगी। राज्य की भौगोलिक विषमताओं को देखते हुए ये तकनीक काफी मददगार रहेगी। उत्तराखण्ड आपदा की दृष्टि से संवदेनशील राज्य है। किसी आकस्मिक आपदा की स्थिति में लोगों से सम्पर्क साधने में ये उपयोगी साबित होगा। ये वीडियो देखिए

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