टिहरी के एक परिवार के इकलौते बेटे की हत्या! इंसाफ के लिए पहाड़ में कैंडल मार्च

टिहरी के एक परिवार के इकलौते बेटे की हत्या! इंसाफ के लिए पहाड़ में कैंडल मार्च

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4 महीने बीत चुके हैं और बेबस परिवार इंसाफ की मांग कर रहा है। उस मां को ये भरोसा ही नहीं हो रहा है कि उसके बेटे ने आत्महत्या की है। 4 बहनें इंसाफ की मांग कर रही हैं और धीरे धीरे सड़क पर लोगों का आक्रोश उमड़ रहा है। हाथों में कैंडल लेकर थरथराते हाथ इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। हमारी आपसे भी अपील है कि शेयर कीजिए ताकि हुक्मरानों तक ये बात पहुंचे और इस परिवार को इंसाफ मिल सके। ये कहानी है टिहरी के रहने वाले आशीष भट्ट की। आशीष भट्ट देहरादून से पढ़ाई कर रहे थे। अचानक एक दिन परिवार वालों को खबर मिलती है कि आशीष की लाश रेलवे ट्रैक के बीचों बीच पड़ी है। 5 फरवरी 2018 की सुबह मियांवाला रेलवे ट्रैक के बीचों-बीच आशीष भट्ट की लाश मिली थी। 27 साल के आशीष चार बहनों के एकलौते भाई थे। सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि सुबह के 5 बजे रेलवे ट्रैक पर उनकी लाश मिली ? इस सवाल का अब तक कोई जवाब नहीं मिला।

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आशीष भट्ट की बहन अर्चना भट्ट का कहना है कि उन्हें आशीष की डेड बॉडी तक देखने नहीं दी गई। रात से सुबह शव मिलने तक देहरादून आई सभी ट्रेनों और उनके ड्राइवर्स की डीटेल्स जुटाई। सभी से बात की गई तो सभी ने खुद ट्रेन में होने की बात तो स्वीकारी लेकिन ये भी कहा कि ना तो ट्रेन की पटरी पर कोई डेड बॉडी थी और ना ही कोई हादसा हुआ ? अब सवाल ये है कि आखिर आशीष भट्ट की लाश ट्रेन की पटरी के बीचों बीच कैसे पहुंची ? परिवार का कहना है कि आशीष के सिर और शरीर पर चोट के निशान थे। उधर पुलिस का कहना है कि ये महज़ आत्महत्या है। क्या सच में ये आत्महत्या है या फिर हत्या ? अगर ये हत्या है तो क्या 4 महीने बीत जाने के बाद भी डोईवाला थाने की पुलिस हत्यारों तक नहीं पहुंची ? अगर ये आत्महत्या है तो पुलिस आत्महत्या की वजह की तह तक क्यों नहीं पहुंची ?

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5 जून के टिहरी के बौराड़ी में कैंडल मार्च निकाला गया। आशीष भट्ट की मौत की CBI जांच करवाने की मांग की गई है। मां-पिता और बहनों की आंखों के आंसू सूख गए हैं, पिता एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और इस बुढ़ापे में परिवार का इकलौता बेटा चला गया। आशीष की दीदी अर्चना भट्ट रूंधे गले से कह रही हैं कि मैं अपने भाई के लिए आखिरी वक्त तक लड़ूंगी। हैरानी की बात तो ये है कि दीदी के बार बार कहने पर पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की । जब डीजीपी से गुहार लगाई गई, तब जाकर एफआईआर दर्ज हो पाई। परिवार का इकलौता बेटा चला गया और पुलिस इसे आत्महत्या का मामला कहकर बस पल्ला झाड़ रही है ? सिस्टम से हमारा सवाल ये है कि आखिर कब तक खामोशी का चोगा शरीर पर ओढ़कर बेफिक्र बैठे रहेंगे ? चार महीने बीत गए और एक परिवार का दर्द इन्हें नहीं दिखता ? वो परिवार अब बेबस होकर सड़क पर उतर आया है।


Uttarakhand News: Murder mystery of ashish bhatt still unsolved

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