देवभूमि में जन्मे थे महाकवि कालिदास, गढ़वाल की धरती से लिखे कई महाकाव्य

देवभूमि में जन्मे थे महाकवि कालिदास, गढ़वाल की धरती से लिखे कई महाकाव्य

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आज हमारे पास प्रमाण रूप में भी हैं और इसके कई साक्ष्य भी मौजूद हैं। कई बार इस बात को लेकर बहस होती है कि महाकवि कालिदास का जन्म उत्तराखंड में हुआ था या नहीं। कई लोग कहते हैं कालिदास उज्जैन में जन्मे थे। लेकिन महाकाव्य ‘मेघदूत’ में बताया गया है कि कालिदास उज्जैन गए थे और सम्राट विक्रमादित्य के राजमहल में रहे थे। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में संस्कृत महाविद्यालय विद्यापीठ की संस्कृत की प्रवक्ता आचार्य पुष्पा नौटियाल ने राज्य समीक्षा से बातचीत के दौरान कई बातें बताई हैं। ‘कुमारसंम्भव’ महाकवि कालिदास की एक अद्भुत रचना है। इसमें लिखा गया है कि ‘’अस्त्युत्तरस्या दिशि देवतात्मा हिमालयो नाम नगाधिराज:। पूर्वापरौ तोयनिधीबगाहय स्थित: पृथिव्या इव मानदण्ड:।।’’ इसका अर्थ है कि उत्तर दिशा में देवात्मा के समान पर्वतों का राजा हिमालय है, जो पूर्व दिशा से लेकर समुद्र तक फैला है, मानो यह पृथ्वी का मानदंड है’’। आगे भी कुछ रोचक बातें हैं।

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उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के रुद्रप्रयाग जिले में गुप्तकाशी के पास कालीमठ नाम का सिद्धपीठ है। कहा जाता है कि इसी क्षेत्र में पड़ने वाले कविल्ठा गांव में महाकवि कालिदास का जन्म हुआ था। कालिदास को महाकाली का उपासक कहा जाता है। बचपन में कालिदास को महामूर्ख की संज्ञा दी गई। वो कहानी तो आपको याद होगी कि कालिदास एक पेड़ में बैठे थे और उसी डाली को पीछे से काट रहे थे। जिस पेड़ को कालिदास काट रहे थे, वो बांज का वृक्ष था। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि बांज का वृक्ष बहुतायत में कहां पाया जाता है। कालजयी लेखक स्व. आचार्य धर्मानन्द जमलोकी ने कालिदास की तीन महान रचनाओं कुमार सम्भवम्‚ मेघदूत और रघुवंश का विस्तृत अनुवाद किया है। इन्हीं रचनाओं में पहाड़ के वैवाहिक रीति–रिवाजों जैसे लड़के वालों का लड़की ढूंढने जाना, मंगलस्नान‚ वस्त्राभूषण और अनुष्ठानों का वर्णन किया गया है। इन्हीं रचनाओं में पहाड़ की खूबसूरती, कंदराओं , जंगलों, झरनों का भी वर्णन किया गया है।

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इसके अलावा एक और पुस्तक है "महाकवि कालिदास"। पंडित सदानन्द जमखोला ने इसमें बताया है कि "महाकवि कालिदास गढ़वाल की केदारघाटी के कविल्ठा के मूल निवासी थे"। दक्षिण भारत की विदुषी लेखिका डॉक्टर कमलारत्नम् ने अपने शोध में बताया है कि ‘कालिदास का जन्म केदारघाटी के कविल्ठा में ही हुआ था।’ कालिदास साहित्य की व्याख्या करने वाले डॉक्टर भगवत शरण उपाध्याय कहते हैं कि ‘कालिदास का जन्म अलका में हुआ था। ये स्थान अलकनन्दा और मन्दाकिनी के मध्य किसी स्थान पर हुआ था। हालांकि कालिदास का जन्म कब हुआ था, आज तक इस बारे में कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है। इसे लेकर विद्यानों के अलग अलग मत हैं। साहित्य के कई मूर्धन्य पंडित ये ही कहते हैं कि महाकवि कालिदास की जन्मस्थली गढ़वाल क्षेत्र का कविल्ठा गांव था और कर्मस्थली मालवा यानी उज्जैन थी। (ये लेख कई साहित्यों से लिया गया है और कई विद्वानों से बातचीत के बाद ही तैयार किया गया है। अगर आपको भी इस बारे में कोई जानकारी हो, तो हमें जरूर बताएं।)


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