उत्तराखंड की मां राकेश्वरी, जहां के पानी से ही शरीर के कई रोग दूर होते हैं

कहा जाता है कि उत्तराखंड के इस मंदिर में आकर कई क्षय रोगी ठीक हो चुके है। उनके शरीर के सारे दाग खत्म हो चुके हैं।

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विशाल परंपरा, अद्भुत संस्कृति और पौराणक साक्ष्यों की धरती कही जाती है देवभूमि। उत्तराखंड में कई रहस्यों को समेटे हुए धर्मस्थल मौजूद हैं। इन धर्मस्थलों में से एक पवित्र जगह है मां राकेश्वरी का मंदिर। काली तीर्थो या मठो मैं सम्भवत मां राकेश्वरी का मन्दिर ऐसा है जहां पर शिव, हनुमान मन्दिर अवस्थित हैं। द्वितीय केदार के नाम से विख्यात मदमहेश्वर के पावन क्षेत्र में पड़ता है मां राकेश्वरी का मंदिर। कहा जाता है कि इस मंजिर के उदक मात्र से ही शरीर में मौजूद कई रोग दूर हो जाते हैं। इसके पीछे एक कहानी भी है। पौराणिक कहानियों में कहा गया है कि चन्द्रमा की 27 पत्नियां थी जिनमें से रोहिणी को वो सबसे ज्यादा प्रेम करते थे। इस पर अन्य पत्नियां नाराज़ हो गई थीं। ऐसे में रोहिणी अपने पिता दक्ष के पास गई। आगे भी जानिए ये कहानी।

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इसके बाद दक्ष और सभी 26 रानियोँ ने चन्द्र देव को शाप दिया कि उन्हेँ क्षय रोग हो जाए। मान्यता है कि चन्द्रमा इसी श्राप की वजह से पूर्णिमा के बाद क्षीण हो जाते हैं। चन्द्रमा ने क्षय रोग से मुक्ति के लिए इसी स्थान पर मां भगवती का तप किया था। मां भगवती चंद्रमां की तपस्या से प्रसन्न हुई और कहा कि पूरे श्राप से तो मुक्ति नहीं मिल सकती लेकिन आपका रंग पूर्णिमा के बाद क्षीण पड़ जाएगा लेकिन इसे बाद आप भी से अपने रूप में कुछ दिन बाद वापस आ सकेंगे। कहा जाता है कि इस वजह से चंद्रमा की कलाएं भी बदलती हैं। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा सबसे तेज़ चमकते हैं और अमावस्या के दिन क्षीण पड़ जाते हैं। इसके बाद धीरे धीरे चांद अपने रूप में वापस आ पाते हैं। इस वजह से मां राकेश्वरी को क्षय रोग दूर करने वाली देवी भगवती कहा जाता है।

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मान्यता है कि कई क्षय रोगी यहाँ आकर माँ राकेश्वरी का पूजन कर ठीक हो चुके हैं। रांसी गांव गढ़वाल का एक बेहद ही शांत और सुन्दर गाँव है । राकेश्वरी देवी मंदिर पेगोडा शैली में बना हुआ है और समय-समय इस मंदिर का जीर्णोद्धार होता रहा है । मंदिर के अंदर "सिंदूर से लाल रंग के शरीर वाली, तीन नेत्र वाली, प्रकाशित माणिक्य मुकुट शुशोभित माँ अम्बिका के सौम्य प्रतिमा के दर्शन होते है" देवरा यात्रा के दौरान यहां नंदा राजजात यात्रा के जैसी ही एक लंबी यात्रा होती है। इस दौरान मां अलग अलग गांवों में जाकर लोगों को अपने दर्शन देती हैं। स्थानीय लोगों की असीम श्रद्धा का फल ये है कि, ये मंदिर अब दुनिया में अलग ही पहचान कायम कर रहा है। यहां रहने वाले लोग ही कई बार कह चुके हैं कि यहां के उदक से शरीर में मौजूद कई रोग दूर हो जाते हैं।


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