देवभूमि की बेटी को सलाम...इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ पहाड़ों को चुना और रचा इतिहास

देवभूमि की बेटी को सलाम...इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ पहाड़ों को चुना और रचा इतिहास

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उम्मीदें कायम होनी चाहिए, हौसला बने रहना चाहिए, जिंदगी की आखिरी सांस तक जो मुश्किलों की परवाह किए बिना आगे बढ़े, वो ही असली चैंपियन कहलाता है। राज्य समीक्षा के माध्यम से हम आपको आज उस बेटी से रू-ब-रू कराने जा रहे हैं, जिसने इंजीनियरिंग की नौकरी को छोड़ा और अपने सपनों को पूरा करने में जुट गई। जब हौसले बुलंद हों, तो मुश्किलें आसान हो जाती हैं। चमोली जिले की इंजीनियर बेटी देवेश्वरी बिष्ट आज हर उस युवा के लिए एक प्रेरणा है, जो उत्तराखंड में रोजगार की राह तलाश रहा है। देवेश्वरी बिष्ट बीते तीन सालों से पहाड़ में स्वरोजगार के लिए जहां ट्रैकिंग और हैरिटेज ट्रैकिंग को प्रमोट कर रही है। इनकी जिंदगी की कहानी और संघर्षों की दास्तान भी बड़ी दिलचस्प है। इस बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।

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17 साल की देवेश्वरी बिष्ट जिंदगी जीने के तरीके को अच्छी तरह समझा। वो भेड़चाल में नहीं चली और एक अलग रास्ता अपनाया। आज देवेश्वरी ने करीब 15 युवाओं को अपने साथ जोड़ दिया है। पहाड़ के साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली देवेश्वरी की उम्र 27 साल है। वो अपने भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। 12वीं तक की पढ़ाई गोपेश्वर में करने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। साल 2009 में उन्होंने जल संस्थान गोपेश्वर में बतौर इंजीनियर काम करना शुरू कर दिया। इसके 3 साल बाद उन्हें उरेडा में भेज दिया गया। एक तरफ नौकरी और दूसरी तरफ देवेश्वरी के मन में उबाल मारता जुनून। इसलिए 2015 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी। ट्रैकिंग के जरिये स्वरोजगार की अलख जगानी शुरू की। आज पहाड़ की संस्कृति और परंपरा को बचाने के लिए भी देवेश्वरी कई काम कर रही हैं।

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बीते कई सालों से उत्तराखंड में कोई महिला ट्रैकर और फोटोग्राफर ऐसी नहीं हैं, जिन्होंने ट्रैकिंग को रोजगार का जरिया बनाया हो। इस वजह से देवेश्वरी बिष्ट का काम सबसे अगल कहा जा सकता है। पहाड़ चढ़ना कोई बच्चों का खेल नहीं और देवेश्वरी बिष्ट ना सिर्फ इस काम को पूरा कर रही हैं बल्कि उनके पास उत्तराखंड की अलग अलग जगहों के ऐसे फोटोग्राफ्स हैं कि आप भी दंग रह जाएं। खास बात ये है कि देवेश्वरी ने पहाड़ के कौथिग, मेलों और पौराणिक जगहों कतो अपने ट्रैकिंग चार्ट में रखा है। अगर आप भी देवेश्वरी के खीचें गए फोटोग्राफ्स देखना चाहते हैं तो ‘ग्रेट हिमालयटन जर्नी’ नाम के फेसबुक पेज पर जाइए। यहां आपको ट्रैकिंग से लेकर हर बात की जानकारी मिलेगी। राज्य समीक्षा की टीम की तरफ से देवेश्वरी बिष्ट को हार्दिक शुभकामनाएं।


Uttarakhand News: Chamoli girl deveshwari bisht success story

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