जब देवभूमि में भीम ने बनाया ये पुल, तो स्वर्गारोहिणी जा सके पांडव...आज भी वैसा ही मजबूत है

जब देवभूमि में भीम ने बनाया ये पुल, तो स्वर्गारोहिणी जा सके पांडव...आज भी वैसा ही मजबूत है

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उत्तराखंड यानी कदम कदम पर रहस्य और रोमांच की भूमि। इस धरती में रामायण से जुड़े सबूत भी आपको मिल जाएंगे, तो महाभारत काल से जुड़े अभेद रहस्यों से भी सामना होगा। आज जिस रहस्य से हम आपको रू-ब-रू करवाने जा रहे हैं। उसे खुद बदरीनाथ आए श्रद्धालु अपनी आंखों के सामने देख भी रहे हैं। जी हां सरस्वती नदी पर बना भीम पुल अब हर किसी के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। भीम पुल को लेकर मान्यता है कि पांडवों को स्वर्गारोहिणी यात्रा के दौरान सरस्वती नदी पार करनी थी। नदी का भयंकर बहाव था और पांडवों को हर हाल में इसे पार करना था। कहा जाता है कि महाबलशाली भीम ने विशालकाय पत्थर को सरस्वती नदी पर रखा और पुल का निर्माण किया था। एक भारी शिला से बना ये पुल आज भी उतना ही सुरक्षित है। सैकड़ों लोग इस पर आज भी आतेजाते हैं।

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जी हां आज भी सैकड़ों की संख्या में लोग इस पर चलते हैं और महाभारत काल के दौरान इस इंजीनियरिंग की मिसाल को देख आश्चर्य चकित होते हैं। भीम पुल के पत्थर में आज भी आपको पांच अंगुलियों के निशान देखेंगे। कहा जाता है कि भीम ने जब इस पत्थर को उठाया था, तो पत्थर पर ही ये निशान पड़ गए थे। बदरीनाथ यात्रा शुरू हो चुकी है और हर यात्री भीम पुल के दर्शन करना नहीं भूलता। सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने इस पुल पर पैराफिट बाउंड्री बनाई है, जिससे कोई नदी में ना जा गिरे। बताया जा रहा है कि इस बार 50 हजार से ज्यादा लोग इस पुल को देखने आ चुके हैं।

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Uttarakhand News: Bhim pul in badrinath

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