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Special Report : उत्तराखंड के इस विभाग में घोर लापरवाही, ऐसे कैसे होगा देवभूमि का 'कल्याण'?

Special Report : उत्तराखंड के इस विभाग में घोर लापरवाही, ऐसे कैसे होगा देवभूमि का 'कल्याण'?

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प्रदेश के समाज कल्याण विभाग का विवादों से बहुत पुराना और मजबूत नाता है। इस विभाग में मुश्किलें हैं कि थमने का नाम ही नहीं लेती। जन-सामान्य से सीधा जुडे हुए इस विभाग की सबसे बड़ी परेशानी ये है कि सर्वाधिक कार्य होने के बावजूद विभाग के पास अपेक्षाकृत कम स्थायी कार्मिक हैं, और जो स्थायी कार्मिक हैं भी उनका भी ठीक प्रकार से उपयोग विभाग कदाचित नहीं कर पा रहा। आलम ये है कि अधिकतर जनपदों में जिला समाज कल्याण अधिकारी हैं ही नहीं, और 4 जनपदों में तो अपर जिला समाज कल्याण अधिकारी की पोस्ट भी खाली है। प्राइवेट और आउटसोर्स कार्मिकों को कई-कई महीने वेतन न मिलना यहाँ आम बात है। ऐसा लगता है कि जैसे विभाग का थिंक-टैंक कुछ सोचने-समझने की ही स्थिति में नहीं है। जनसामान्य को पेंशन, छात्रवृत्ति और अन्य कई प्रकार के अनुदान बांटने वाला ये विभाग अपने ही कार्मिकों की समस्याएं नहीं सुलझा पा रहा। ताजा मामला विभाग के सहायक समाज कल्याण अधिकारियों (ADOs) का है, जो पिछले काफी समय से अपनी परेशानियों को विभाग के उच्च स्तरीय अधिकारियों के सम्मुख रख रहे हैं परन्तु बार-बार अनसुना होते देख अब कार्य-बहिष्कार करने का मन बना चुके हैं। ADOs का कहना है कि यदि अभी भी उनकी परेशानियों का समाधान नहीं किया जाता है तो 1 जून से कार्य-बहिष्कार तय है।

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दरअसल, हर एक ब्लाक में समाज कल्याण विभाग का एक ADO तैनात होता है जो कि उस पूरे ब्लाक में विभाग का इकलौता कार्मिक होता है और सभी विभागीय गतिविधियों के लिए जिम्मेदार होता है। एक ब्लाक में लाभार्थियों की संख्या हजारों में होती है, जिसके मध्यनजर केवल एक ही अधिकारी पर कार्यभार बहुत अधिक हो जाता है। इन सभी महत्वपूर्ण बातों को नजरअंदाज करते हुए ADOs को आये दिन बिना सोचे समझे दंड देना विभाग की पुरानी आदतों में शुमार है। लाभार्थियों की अधिकता के चलते पिछले कई समय से ADOs एक कंप्यूटर ऑपरेटर रखने की जायज मांग कर रहे हैं परन्तु अभी तक 'देखते हैं', 'जल्द ही हो जाएगा' जैसे जुमलों की आड़ में इन अधिकारियों का मानसिक और शारीरिक शोषण बदस्तूर जारी है। इससे आजिज आ कर 13 मई को देहरादून के डोईवाला ब्लॉक सभागार में विभाग के सहायक समाज कल्याण अधिकारियों की एक बैठक हुई। बैठक में पिछले कई वर्षों से चली आ रही समस्याओं के सम्बन्ध में चर्चा हुई और अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों के नकारात्मक रवैये के खिलाफ आवाज उठाते हुए 01 जून से कार्य-बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया।

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यहाँ एक ख़ास बात ये भी है कि सहायक समाज कल्याण अधिकारी इससे पहले भी कई बार विभाग के निदेशक को इस बाबत अपनी सभी परेशानियां बता चुके हैं। सहायक समाज कल्याण अधिकारी परिषद् के अध्यक्ष विनोद नैथानी और परिषद के महामंत्री दीपांकर घिल्डियाल ने राज्य समीक्षा से एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि इस साल भी 18 जनवरी, 06 मार्च, 15 अप्रैल और 25 अप्रैल को विभागीय निदेशक के सम्मुख बिन्दुवार परेशानियां रखी गयीं थी। हर बार की ही तरह इस बार भी 'जल्द ही हो जाएगा' कहते हुए मामले को ठन्डे बस्ते में डाल दिया गया। जन सामान्य को इस साल पेंशन की पहली किश्त जून में दी जानी है, साथ ही छात्रवृत्ति वितरण का कार्य भी मुंह बाये खड़ा है। यदि सहायक समाज कल्याण अधिकारी परिषद् कार्य-बहिष्कार करती है तो ऐसे में लाभार्थियों को योजनाओं से लाभान्वित करने का कार्य निश्चित रूप से प्रभावित होगा। देखना दिलचस्प होगा कि अपने ही अधिकारियों को अनदेखा कर जन सामान्य को दिए जाने वाले लाभ को कब तक हांसिये पर रखेगा समाज कल्याण विभाग।


Uttarakhand News: Special Report on Social Welfare Uttarakhand

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