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मदर्स डे पर विशेष : 5 प्रसिद्ध पहाड़ी गीत जिनमे मां को किया गया है याद... आप भी सुनिए

मदर्स डे पर विशेष : 5 प्रसिद्ध पहाड़ी गीत जिनमे मां को किया गया है याद... आप भी सुनिए

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मातृ देवो भवः की भावना वाले अपने उत्तराखंड में मां को भगवान से भी अधिक माना गया है। मां शब्द में ही एक ऐसी शक्ति है जिसे किसी भी मुसीबत में हम सबसे पहले पुकारते हैं। बिना मां के हमारे अस्तित्व की कल्पना करना भी असंभव है, बल्कि मां की महिमा को शब्दों में बयान करना ही संभव नहीं। मां के इसी प्यार, समर्पण और ताकत को सम्मान देने के लिए यह एक दिन माँ को समर्पित करने के लिए मदर्स डे मनाया जाता है। गूगल ने मदर्स डे पर एक बेहतरीन रंग-बिरंगा डूडल बनाया है। इस डूडल में एक मादा डायनासोर और बच्चा डायनासोर है। डूडल में देखा जा सकता है कि डायनासोर जैसे विशालकाय और शक्तिशाली जानवर को भी मां की मातृ छाया की जरूरत होती है। इस मदर्स डे पर हम आपके लिए लेकर आये हैं उत्तराखंड के जनमानस से जुड़े हुए पांच गीत और कवितायेँ जो माँ को समर्पित हैं। सुनिए ...
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1. सौणा का मैना ब्वे कनु क्वे रैणा

नरेन्द्र सिंह नेगी द्वारा गाया गया ये कालजयी गीत माँ को समर्पित है। यह गीत नेगी जी द्वारा माँ को याद करते हुए बनाया गया है। माँ से दूर कोई भी इंसान बदलते मौसमों में कैसे अपनी माँ को याद करते हुए खुद ही कह उठता है कि तेरे बगैर सब अधूरा है माँ... सुनिए और महसूस कीजिए ...
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2. सात समोदर पार चि जणू ब्वे

यह गढ़वाली गीत उत्तराखंड के महान संगीतकार स्वर्गीय श्री चन्द्र सिंह राही द्वारा लिखा और गाया गया है। इस गीत में राही जी द्वारा माँ को छोड़ कर विदेश जाने की व्यथा को दिल को छू लेने वाले अपने ही अंदाज में व्यक्त किया है।
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3. हे माता त्येरी जै जैकारा

कुमाऊ के सुप्रसिद्ध कवि, लेखक और गायक गिरीश तिवारी 'गिर्दा' का यह कालजयी गीत मातृभूमि उत्तराखंड के लिए समर्पित है। गीत के बोल और संगीत आज भी युवा संगीतकारों के लिए प्रेरणादायक हैं। गीत सुनिए और गिर्दा के शब्दों के जरिये मातृभूमि को प्रणाम कर लीजिए...
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4. 'ईजा का चेहरा' कुमाऊँनी कविता

चर्चित कुमाऊँनी कवि और लेखक डॉ. अनिल कार्की जी ने अपनी इस कविता में "ईजा के चेहरे" के बारे में लिखा है। कुमाऊँनी में ईजा का मतलब "माँ" होता है। कवि ने माँ की हकीकत को बयां किया है, कि माँ अपने घर के काम काज के साथ साथ किस तरह अपने बच्चों का ख्याल रखते हुये एक कठिन जीवन को हंसी हंसी जी जाती है। सुनिये...
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5. हे माजी पहाड़ छुटी ग्ये

यू ट्यूब पर वायरल यह कुमाऊँनी गीत एक ऐसे बच्चे को ध्यान में रखकर बनाया गया है जो काम करने और पैसे कमाने को पहाड़ छोड़ देता है। पहाड़ छोड़ने के बाद एक बच्चा अपनी माँ को किस प्रकार याद करता है, यह इस गीत में दिखाया गया है। आप भी देखिये और महसूस कीजिए ...


Uttarakhand News: 5 pahadi songs dedicated to mother on Mothers Day

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