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पहाड़ के गरीब घर का बेटा, बचपन में चल बसे थे पिता, अब असिस्टेंट कमांडेंट बनकर दिखाया

पहाड़ के गरीब घर का बेटा, बचपन में चल बसे थे पिता, अब असिस्टेंट कमांडेंट बनकर दिखाया

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मां का सपना था कि उनकी आंखों का तारा जीवन में बड़ा नाम करे। रास्त में ना जाने कितनी बाधाएं आईं। लेकिन पहाड़ के विपिन सिंह रावत ने हर मुश्किल को पार कर दिया। इस सपूत ने साबित कर दिया कि मेहनत का कोई और विकल्प नहीं है, लक्ष्य पर निशाना साध कर रहिए, खुद पर और ऊपरवाले पर भरोसा कीजिए। हम बात कर रहे हैं उत्तरकाशी जिले के भाटिया गांव के विपिन सिंह रावत की। हाल ही में सीआरपीएफ की आंतरिक सुरक्षा अकादमी माउंटआबू में पासिंग आउट परेड हुई। इस अकादमी से इस बार उत्तराखंड के 4 अधिकारी पासआउट हुए हैं। इनमें से एक हैं विपिन सिंह रावत। विपिन जब सातवीं कक्षा में थे, तो उनके पिता चल बसे। उनके पिता का नाम हरीश चंद्र था। पिता की मौत के बाद मां ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली।

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विपिन की मां पूर्णी देवी गृहणी हैं। परिवार में विपिन तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। मां ने हौसला नहीं खोया और तीनों भाइयों को एक रास्ते पर लेकर आगे बढ़ती रही। एक गरीब घर की महिला को तीनों बच्चों को संभालने, उन्हें पढ़ाने से लेकर पेट पालने तक ना जाने कितना जतन करना पड़ा होगा, ये बात आप अच्छी तरह से समझ सकते हैं। बच्चों ने भी मां के विश्वास को डिगने नहीं दिया। विपिन के बड़े भाई इंटर कॉलेज में प्रवक्ता हैं। इसके अलावा उनके दूसरे भाई एसोसिएट आर्ट डायरेक्टर हैं। विपिन सिंह रावत भी पढ़ाई में शुरू से ही अव्वल रहे। उन्होंने सरकारी स्कूल से शिक्षा प्राप्त की है। साल 2002 में हाईस्कूल नौगांव से उत्तीर्ण किया। इसके बाद साल 2004 में उन्होंने इंटरमीडिएट इंटर कॉलेज बड़कोट से उत्तीर्ण किया। इसके आगे की कहानी दिलचस्प है।

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डीएवी कालेज देहरादून से स्नातक और स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद विपिन का सलक्शन स्टेट बैंक में क्लर्क के पद पर हुआ। इसके बाद भी वो आगे की तैयारी करते रहे। साल 2009 में हुआ सीआरपीएफ में उनका सब इंस्पेक्टर के लिए चयन हुआ। इसके बाद उन्होंने पदोन्नति पाई और इंस्पेक्टर पद पर नियुक्त हो गए। इसके बाद विपिन ने लक्ष्य पर निशाना साधा। अगस्त 2017 में विपिन ने पहली बार में ही असिस्टेंट कमांडेंट की परीक्षा को पास कर लिया और कमीशन पास किया। राजस्थान के माउंट आबू में वो सोमवार को सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट बने। पहाड़ के युवाओं ने बार बार अपने काबिलियत से रास्त में आने वाली तमाम मुश्किलों को दूर किया है। असिस्टेंड कमांडेंट विपिन सिंह रावत को पदोन्नति के लिए शुभकामनाएं।


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