उत्तराखंड में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम, लागू होगा फीस एक्ट...इसकी खास बातें जानिए !

उत्तराखंड में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम, लागू होगा फीस एक्ट...इसकी खास बातें जानिए !

Uttarakhand dehradun trivendra govt may announce fees act in next meeting  -  उत्तराखंड न्यूज, त्रिवेंद्र सिंह रावत ,उत्तराखंड,

उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डेय का कहना है कि अगर माहौल अनुकूल रहा तो अगली कैबिनेट मीटिंग में फीस एक्ट पर मुहर लग जाएगी। इसके तहत कोई भी प्राइवेट स्कूल फील के लिए मनमानी नहीं कर सकेगा। प्राइवेट स्कूलों को ग्रेडिंग सिस्टम में बांटा जाएगा। ग्रेडिंग सिस्टम के मुताबिक ही फीस तय की जाएगी। अगर इस कमेटी द्वारा किसी प्राइवेट स्कूल की शिकायत सही पाई गई, तो पहली बार 1 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। दूसरी बार शिकायत प्राप्त हुई तो 5 लाख रुपये का का जुर्माना लगेगा। तीसरी बार अगर शिकायत पाई गई तो स्कूल की मान्यता रद्द की जाएगी। इसका प्रावधान इस एक्ट में रखा गया है। स्कूलों को 1 महीने के भीतर इस शिकायत का निपटारा करना होगा। शिक्षा सत्र के शुरु होती है सभी प्राइवेट स्कूलों को अपनी फीस वेबसाइट पर डालनी होगी।

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कोई भी प्राइवेट स्कूल अग्रिम शुल्क महीं वसूल सकता। बताया जा रहा है कि इस पर अगली कैबिनेट मीटिंग में मुहर लग सकती है। शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डेय का कहना है कि फीस रेगुलेशन एक्ट के तहत प्रदेश और जिला स्तर पर रेगुलेशन कमेटी का गठन होगा। जिला स्तर पर डीएम के साथ ही CEO, DM द्वारा नामित कोई CA, PWD एक्शन, अभिभावक और किसी प्राइवेट स्कूल के प्रिंसिपल या डायरेक्टर इस रेगुलेशन कमेटी के सदस्य होंगे। जिला स्तरीय समिति का कार्यकाल दो साल का होगा। अब आपको राज्य स्तरीय समिति के बारे में भी बता देते हैं। राज्य स्तरीय कमेटी में शिक्षा डायरेक्टर विद्यालय शिक्षा, सचिव विद्यालय, PWD के चीफ इंजीनियर, CA, प्राइवेट स्कूल के प्रतिनिधि और सचिव द्वारा नामित कोई अभिभावक होंगे। राज्य स्तरीय समिति का कार्यकाल भी दो साल होगा।

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प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने एनसीईआरटी का नियम लागू किया था। इस नियम के बाद से बच्चों के कंधे से बस्ते का बोझ कम तो हुआ ही, साथ ही अभिभावकों की जेब का खर्च कम हो गया। इससे पहले निजी स्कूल किताबों के नाम पर फिजूल की किताबें बच्चों को थमाते थे। साल भर जो किताबें इस्तेमाल ही नहीं होती थी, उके लिए अभिभावकों को जबरन जेब ढीली करनी पड़ती थी। ये ही किताबें बच्चों के कंधे का बोझ भी बढ़ाती थी। अब बताया जा रहा है कि एनसीईआरटी लागू करने के बाद शिक्षा विभाग ने अब प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए एक स्पेशल एक्ट तैयार किया है। खबर है कि शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डेय ने सोमवार के दिन इस बात को लेकर अधिकारियों की बैठक ली।


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