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Image: Story of an Uttarakhandi Boy Aakash Nautiyal

पहाड़ी लड़का IIT स्टूडेंट्स का खाना बनाते-बनाते बना कोडिंग-एक्सपर्ट, 19 की उम्र में कमाता है लाखों

पहाड़ी लड़का IIT स्टूडेंट्स का खाना बनाते-बनाते बना कोडिंग-एक्सपर्ट, 19 की उम्र में कमाता है लाखों

उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी जिले का लड़का, आकाश नौटियाल। तेरह साल की उम्र में ये लड़का घर छोड़ भाग निकला था। जब घर से भगा था तो सिर्फ एक ही जगह के बारे में जानता था ... मुम्बई। मुंबई जिसे अवसरों की भूमि (Land of Oprtunities) कहा जाता है। जिस शहर के बारे में या कहा जाता है कि "यह शहर कभी नहीं सोता, और इस शहर के पास हर किसी को देने के लिए कुछ न कुछ ज़रूर होता है"। शायद यही सब सोच कर इस लड़के ने भी मुम्बई जाने का निश्चय किया। ये पहाड़ी लड़का बहुत कम पढ़ा लिखा था, तो आकाश को शुरुवात में कहीं भी काम नहीं मिला। फिर मजबूरी में पेट पालने के लिए उसने दुकानों में जा-जा कर एक सिगरेट कंपनी की मार्केटिंग की। आकाश गिटार बजा लेता था तो महज कुछ पैसों के लिए मुंबई के कई लोकल पब में गिटार भी बजाया। जितना भी आकाश कमा लेता था वह केवल पेट भरने के लिए ही काफी हो पता था। 2014 में आकाश ने मुंबई के एक कॉल-सेंटर में काम करना शुरू किया और इस नौकरी से उन्हें थोडा बहुत पैसा मिलना शुरू हुआ तो किराये पर कमरा लेकर रहना शुरू किया।

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पर शायद होनी को कुछ और ही मंजूर था। एक दिन जब आकाश ड्यूटी पर थे, उनके किराये के कमरे पर चोरी हो गयी। कॉल सेण्टर की नौकरी से आकाश ने जितना कुछ जोड़ा था, वो सब एक ही झटके में छिन गया। उनका सारा कैश, जो उन्होंने जमा किया था, किताबें और उनका लैपटॉप भी चोर ले गये। नौबत ये आ गयी कि घर का किराया देने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं थे, और इसी वजह से उनके मकान मालिक ने उन्हें घर छोड़ने को कह दिया। किस्मत ने आकाश को एक बार फिर से पटखनी दे दी थी। आकाश का मन कॉल सेण्टर की नौकरी से भी भर गया था। पर इस पहाड़ी लड़के ने हिम्मत नहीं हारी। शांत चित्त होकर एक बार फिर इस जीवन से लड़ने की ठानी। इसी दौरान उन्हें एक अपार्टमेंट में कुछ लड़कों के लिए खाना बनाने का काम मिल गया। ये लड़के आईआई टी मुंबई के स्टूडेंट्स थे। आकाश को नहीं पता था कि यह उनकी सफलता की नई शुरुआत है और यह उनके जीवन को पूरी तरह से बदल देगी। आईआईटी स्टूडेंट्स दिन भर लैपटॉप पर ही काम करते रहते थे।

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एक दिन उत्सुकतावश आकाश ने उनसे पूछा कि वे लोग लैपटॉप पर क्या करते रहते हैं। तब स्नेहिल बक्शी, जो आज housing.com के को-फाउंडर हैं, ने कहा कि “तुम जो फेसबुक और व्हाट्सएप्प यूज़ करते हो न, वैसी वेबसाइट्स, ऐप्स पर कोडिंग की जाति है। कम्प्यूटर पर सीखना पड़ता है इन कोड्स को एकजूट करने का काम। हम वो कोडिंग करते हैं।” यह सुनकर आकाश की उत्सुकता बढ़ी और धीरे-धीरे इन सब में रुचि भी हो गई। फिर वह कोडिंग और प्रोग्रामिंग के बेसिक्स सीखने लगे। शुरुआती मदद उन्हें आईआईटी के लड़कों से मिल गई और बाक़ी उन्होंने ऑनलाइन कोर्स के द्वारा सीखा। आकाश बहुत जल्द ही इसमें निपुण हो गए। पन्द्रह महीने तक इन्होंने अपना अधिकतर समय कोडिंग स्किल्स बेहतर करने में लगाए। आकाश सुबह खाना बनाते, फिर घर साफ करते और कुछ समय के लिए सो भी जाते लेकिन जैसे ही वे लड़के घर आते थे तो वह अपना कंप्यूटर लेकर इन स्टूडेंट्स के साथ बैठकर कोडिंग करते थे। साल भर के भीतर ही इन्होंने फ्रंट-एन्ड, बैक-एन्ड और डेटाबेस हैंडलिंग सीख लिया। आकाश खाना बना कर महीने में महज आठ से दस हजार तक कमा लेते थे और आज अपनी कोडिंग स्किल से महीने के लाखों कमा लेते हैं। वर्तमान में वह मुम्बई-बेस्ड इम्पैक्ट रन में आईओएस डिवेलपर के रूप में काम कर रहे हैं।

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