श्रीलंका में फंसा उत्तराखंड युवा, वेतन मांगने पर हुई पिटाई...तो देवदूत बने रोशन रतूड़ी !

श्रीलंका में फंसा उत्तराखंड युवा, वेतन मांगने पर हुई पिटाई...तो देवदूत बने रोशन रतूड़ी !

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उत्तराखंड के रोशन रतूड़ी अब मदद का दूसरा नाम बन गए हैं। विदेश में फंसे किसी युवक को अगर रोशन रतूड़ी का नंबर मिल जाए, तो ये बात भी तय है कि वो बच जाएगा। मदद करने का आलम ये है कि रोशन रतूड़ी 550 का आंकड़ा पूरा करने वाले हैं। इंसान अपनी जिंदगी में किसी एक इंसान की भी मदद कर ले, तो खुद को धन्य समझता है। यहां तो रोशन रतूड़ी 550 का आंकड़ा छूने वाले हैं। टिहरी के हिंडोलोखाल के रहने वाले रोशन काफी वक्त पहले दुबई चले गए थे। वहां उन्होंने इंसानियत की सेवा करने की अलख जगाई और अब तक 549 लोगों को विदेशी धरती पर बचा चुके हैं। अपने खर्च से ही आफत में फंसे लोगों के कागज तैयार करना, यहां तक कि हवाई टिकट का खर्च भी वो खुद ही उठाते हैं। इस बार रोशन रतूड़ी ने उत्तराखंड के एक और शख्स को नई जिंदगी दी है।

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उत्तराखंड के पूरब सिंह श्रीलंका में रोजगार की तलाश में गए हुए थे। वहां रोजगार तो मिला , लेकिन पूरब को बंधुआ मजदूर बना लिया गया। श्रीलंका में मालिक ना तो वेतन दे रहा था और पासपोर्ट भी मालिक द्वारा जब्त कर लिया गया था। पूरब सिंह जब अपने हक की आवाज उठाता तो उसे मार पड़ती थी। मुश्किल में फंसे पूरब को फेसबुक के जरिए रोशन रतूड़ी का नंबर मिला। रोशन रतूड़ी से संपर्क किया गया और अपनी तमाम परेशानियां बताई गई। रोशन इसके बाद अपने काम में जुट गए। आखिरकार मेहनत रंग लाई और पूरब सिंह को न केवल पासपोर्ट वापस मिला बल्कि टिकट और वेतन भी मिल गया। आज पूरब सिंह अपने घर पहुंच गए हैं। रोशन रतूड़ी ने एक बार फिर से साबित कर दिखाया कि किसी काम को अगर दिल से करना चाहो तो पूरी कायनात आपको सफल बनाने में जुट जाती है।

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इस बारे में रोशन ने अपने फेसबुक पेज पर जानकारी दी है। उन्होंने लिखा है कि ‘एक और भारतीय नागरिक नाम पूरब सिह, जन्म स्थान खोला केमार ,उत्तराखंड...जो श्रीलंका में फंसे हुए थे। कई महीनों से बहुत तकलीफ मै थे। मालिक लोगो का व्यवहार अच्छा नही था। इनको वतन नही आने दे रहे थे और इनका पासपोर्ट नही दे रहे थे।पासपोर्ट मांगने पर मारने को आते थे’। रोशन आगे लिखते हैं कि ‘जब इनको फेसबुक से मेरा नम्बर मिला इन्होंने तुरंत मुझसे सम्पर्क किया और मुझे अपना दुख बताया’। आगे लिखा गया है कि ‘मैने इनके दोनों मालिकों से बात की और नतीजा ये निकला कि भाई को उसके पासपोर्ट साथ साथ टिकट और वेतनमान भी दिलवा दिया। भाई पूरब सिह जी अपने वतन पहुँच गये है और अपने परिवार के साथ में है’। उत्तराखंड के इस सपूत की जितनी तारीफ की जाए उतना कम है।


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