त्रिवेंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई, अब तक 20 गिरफ्तार, हरीश रावत तक पहुंची जांच की आंच!

त्रिवेंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई, अब तक 20 गिरफ्तार, हरीश रावत तक पहुंची जांच की आंच!

CM trivendra singh rawat taking action against corruption  - उत्तराखंड न्यूज, त्रिवेंद्र सिंह रावत  ,उत्तराखंड,, बीजेपी

300 करोड़ का घोटाला, जिसने उत्तराखंड की सियासी सरजमीं में उथल-पुथल मचा दी थी। हरीश रावत के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में ये कथित घोटाला हुआ और सूत्र बताते हैं कि अब जांच की आंच हरीश रावत तक जा सकती है। उधमसिंह नगर जिले में एनएच-74 के चौड़ीकरण की बात तो की गई थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण के लिए जो मुआवजा राशि बांटी गई, उसमें 300 करोड़ रुपये का घोटाला हो गया। इसके बाद बीजेपी सत्ता में आई तो सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सुशासन की बात कहकर इरादे साफ कर लिए थे। करप्शन के खिलाफ नो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई और एक साल के भीतर करीब 20 लोगों की गिरफ्तारी बताती है कि एसआईटी हर जगह बाज़ की तरह नजरें गड़ाए है। हाल ही में एसआईटी ने किशोर उपाध्याय से पूछताछ की थी। खबरें तो ये भी है कि किशोर ने पूर्व सीएम को इस बारे में अलर्ट भी किया है। ये भी जानिए कि अब तक कितनी बड़ी मछलियां जाल में फंसी हैं।

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खबरें तो ये भी हैं कि किशोर ने खुद को अकेला देखकर अपनी ही पार्टी की एकता पर सवाल खड़े कर दिए और हरीश रावत को अलर्ट कर दिया है। 2017 में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री का पद संभाला तो इसके तुरंत बाद कुमांऊ कमिश्नर की जांच रिपोर्ट पर संज्ञान लिया गया। सुशासन के मुद्दे पर अमल किया गया और तीन उप-ज़िलाधिकारियों समेत कई अधिकारियों को सस्पेंड किया गया। जरा सिलसिलेवार तरीके से जानिए कि एक साल के भीतर अब तक इस केस में क्या क्या हुआ है। जून 2017 को रुद्रपुर पुलिस ने एक पेशकारी को गिरफ्तार किया, जिसके पास से 214 फाइलें मिली थीं। उसके पास सोने-चांदी के गहने और कई क्रेडिट कार्ड्स भी मिले थे। इसके बाद अक्टूबर 2017 में इस घोटाले के आरोपी पूर्व एसएलओ डीपी सिंह की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी ने जोर लगा दिया।

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लुकआउट नोटिंस जारी कर दिया गया। नवंबर 2017 में एसआईटी ने जसपुर और काशीपुर तहसीलों की जांच के बाद साक्ष्य जुटाए और सबूतों के आधार पर एसडीएम, दो तहसीलदारों और पांच अन्य लोगों को गिरफ्तार कर दिया। सस्पेंड चल रहे एसडीएम भगत सिंह फोनिया, निलंबित संग्रह अमीन अनिल कुमार, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार काशीपुर मदन मोहन पडलिया, सेवानिवृत्त प्रभारी तहसीलदार भोलेलाल, अनुसेवक जसपुर तहसील रामसमुझ, स्टांप वेंडर जीशान, काश्तकार ओम प्रकाश और काश्तकार चरन सिंह को गिरफ्तार किया गया। 2017 के नवंबर महीने में ही घोटाले का मुख्य आरोपी पूर्व एसएलओ डीपी सिंह सरेंडर करने के लिए पहुंच गया। 26 दिन से डीपी सिंह एसआईटी से आंख-मिचौली कर रहा था।

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2018 के जनवरी महीने में एक पीसीएस अधिकारी और प्रभारी तहसीलदार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। निलंबित एसडीएम अनिल शुक्ला और प्रभारी तहसीलदार मोहन सिंह बिष्ट को अरेस्ट किया गया। इस साल फरवरी के महीने में एसआईटी ने अंडरग्राउंड चल रहे निलंबित पीसीएस अफसर एनएस नगन्याल को भी अरेस्ट कर दिया। फरवरी के महीने तक इस घोटाले में कुल 17 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका था, 11 की जमानत खारिज हो चुकी थी और कोर्ट में 12 के लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी। असल मोड़ आया 2018 के मार्च में...अंडरग्राउंड चल रही एलाइड इंफ्रा की एमडी प्रिया शर्मा और निदेशक सुधीर चावला के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट से कुर्की के आदेश ले लिए। पुलिस अब इन दोनों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। लगातार होती कार्रवाइयां ये साबित कर रही हैं कि सरकार दोषियों को बख्शने के मूड में कतई नहीं है।


Uttarakhand News: CM trivendra singh rawat taking action against corruption

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