Video: उत्तराखंड में पौलेंड की लड़की, गांव में रही और दुनिया को बताई पहाड़ों की ताकत

Video: उत्तराखंड में पौलेंड की लड़की, गांव में रही और दुनिया को बताई पहाड़ों की ताकत

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ये वीडियो देखकर शायद आपको गर्व होगा, ये वीडियो देखकर आप उन बुजुर्गों से भी शायद कुछ सीख सकें, जिन्होंने हमारी परंपराओं का हथकरघा चलाए रखा। जी हां अतुल्य उत्तराखंड की एक और कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं। तग्मारा...जी हां इस लड़की का नाम तग्मारा है। पौलैंड की इस लड़की ने कल्चरल हैरिटेज प्रोटेक्शन विषय में ग्रेजुएशन किया है। ये बात तो आप जानते ही होंगे कि इस मामले में यानी कल्चरल हैरिटेज के मामले में उत्तराखंड हमेशा से ही अगृणी रहा है। यहां लोगों ने तमाम सुविधाओं से दूर रहकरद भी जीने के ऐसे ऐसे तरीके ढूंढ निकाले थे कि हर कोई देखता रह गया। खैर तग्मारा उत्तराखंड के लालुरी गांव आई और यहीं रहने लगी। तग्मारा कहती हैं कि उत्तराखंंड में कुछ ऐसी चीजें हैं, जिन्हें दुनिया के सामने लाना बेहद जरूरी है।

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तग्मारा ने जब लालुरी गांव में कदम रखा तो, गांव के एक बुजुर्ग ने उन्हें उन वनस्पतियों के बारे में बताया, जिनका इस्तेमाल इलाज के लिए किया जाता है। इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि बुजुर्ग द्वारा तग्मारा को ‘’बस्यां’’ के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। बुजुर्ग कहते हैं कि अगर शरीर में कहीं कट जाए तो बस्यां को पीसकर उसका रस डालने से ठीक हो जाता है। तग्मारा कहती हैं कि दवाओं की जरूरत ही क्या है, जब उत्तराखंड में ऐसी प्रकृतिक दवाएं मौजूद हैं। इसके अलावा बुजुर्ग द्वारा तग्मारा को किनगोड़ां के बारे में भी बताया जाता है। इसके बाद तग्मारा ने गांव के ही एक बुजुर्ग से ताकुली के बारे में जाना। ताकुली के बारे में आप जानते हैं ? ताकुली का इस्तेमाल भेड़ की ऊन से कपड़े बनाने के लिए किया जाता है, जिसे अब हर कोई भूल रहा है।

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इसके साथ ही पहाड़ में बनने वाले पठाल के घरों को तैयार करने की कला देखकर तग्मारा मंत्रमुग्ध हो गईँ। इसके अलावा तग्मारा ने एक और खास बात सीखी। भ्यूंल की छाल से स्योलू बनाना और उसे बाद में रस्सी को रूप देना। ये सब कुछ सीखकर तग्मारा पोलैंड गई हैं और इन कलाओं को दुनिया के सामने पेश करने जा रही हैं। आप भी ये वीडियो जरूर देखें।

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