उत्तराखंड के किसान की बेटी ...कम उम्र में ही फतेह किया शिखर... मनोहर पर्रिकर कर चुके हैं सम्मानित

उत्तराखंड के किसान की बेटी ...कम उम्र में ही फतेह किया शिखर... मनोहर पर्रिकर कर चुके हैं सम्मानित

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सरयू और गोमती नदियों के संगम पर स्थित उत्तराखंड के एक खूबसूरत हिल स्टेशन बागेश्वर पिंडारी ग्लेशियर के सुरम्य ट्रेक, कौसानी की चाय और सातवीं शताब्दी के बैजनाथ मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। पर एक पहाड़ी बेटी भी है जो बागेश्वर में स्थानीय सेलिब्रिटी है। पूजा मेहरा जो स्कूल में राष्ट्रीय स्तर की कबड्डी खिलाड़ी थी, उन दस राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) कैडेटों में से एक है, जिन्होंने अप्रैल 2016 में माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी। उत्तराखंड की इस बेटी की सफलता को एक बात और भी ज्यादा खास बनाती है, वह है उनका ठेठ पहाड़ी होना। पेशे से ये लड़की माउन्ट एवरेस्ट फतेह करती है और जब अपने घर पर होती है तो अपनी मां के साथ खेतों में काम करती है, जंगलों में ईंधन-लकडियाँ इकट्ठा करती है... शाम तब ढलती है जब ये ठेठ पहाड़ी लड़की गुनगुनाते हुए मवेशियों को घर की तरफ हांकती है। पूजा ने माउन्ट एवरेस्ट के बारे में पहली बार दार्जिलिंग के हिमालय पर्वतारोहण संस्थान (एचएमआई) में एन.सी.सी. के एक केम्प में अपने वरिष्ठों से पहली बार सुना।

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पूजा के पिता बागेश्वर में किसी पहचान वाले की गाडी चलते हैं और महीने के नौ हजार कमाते हैं। वर्ष 2015 में, एन.सी.सी. के इच्छुक पर्वतारोहियों के लिए उत्तराखंड के औली क्षेत्र में त्रिशूल पीक (23,360 फीट) और मनाली क्षेत्र में नाग तिब्बा शिखर (19,688 फीट) पर पर्वतारोहण केम्प लगे थे। जहाँ पूजा से सफलता पूर्वक प्रतिभाग करते हुए दोनों केम्प किये थे। बाद में पूजा ने एनसीसी से एक पत्र प्राप्त किया जिसमें उन्हें सूचित किया गया कि उन्हें माउंट एवरेस्ट के लिए एक अभियान के लिए चुना गया था। इस युवा पहाड़ी लड़की ने अपने परिवार को केवल इतना कहा कि वह यह काम बहुत आसानी से कर जाएगी. "पहाड़ ही तो चढ़ना है"। समाज के कुछ लोग जो उनकी सुरक्षा के बारे में चिंतित थे, ने पूजा के माता-पिता को चेतावनी दी कि सागरमथा (माउंट एवरेस्ट का दूसरा नाम) एक ऐसी जगह है जहां से कोई भी वापस नहीं लौटाता।

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जनवरी 2016 में, पूजा और नौ अन्य कैडेट्स का चयन किया गया जिन्हें सियाचिन ग्लेशियर में एक माह के प्रशिक्षण शिविर में ट्रेनिंग दी गयी। दो महीने बाद, यह टीम 21 अप्रैल को एवरेस्ट के बेस केम्प पंहुची और उसके बाद एक बार फिर एक महीने शीतकालीन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। कई दिनों तक 23,000 फुट और 26,000 फीट पर रहने के बाद कर्नल महान कर्की और मेजर दीपिका राठौर की अगुवाई वाली पर्वतारोहियों की टीम 21 मई को विश्व के सर्वोच्च शिखर पर पंहुची। पूजा तब 18 वर्ष की उम्र की थी। लगभग एक हफ्ते बाद पूजा टीम के साथ वापस लौटी। गणतंत्र दिवस 2017 में, पूजा और नौ अन्य एनसीसी कैडेटों - रिजजन डोलकर, ताशी कास्किट, त्रिशला गुरूंग, स्टेनीज लस्कीट, बलजीत कौर, लाल्रित्लुआंगी, त्सरिंग एंगमो, सुलेखा चना तमांग और कुमारी नूतन - को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर द्वारा प्रतिष्ठित रक्षा मंत्री पदक से सम्मानित किया गया था। उत्तराखंड की ये बहादुर बेटी पेशेवर पर्वतारोहण का कोर्स करना चाहती है, और भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहती है। शुभकामनाएं पूजा ... उज्जवल भविष्य आपकी राह देख रहा है !

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Uttarakhand News: Puja Mehra Scaled The Everest

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