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उत्तराखंड का अमृत, जिसके स्वाद के दीवाने हैं बड़े-बड़े दिग्गज, इसकी खूबियां बेमिसाल हैं

उत्तराखंड का अमृत, जिसके स्वाद के दीवाने हैं बड़े-बड़े दिग्गज, इसकी खूबियां बेमिसाल हैं

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी गर्मियों की छुट्टियों में जब नैनीताल जाते थे तो इस पौष्टिक आहार आहार की खीर खाना नहीं भूलते थे। ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स और उनकी पत्नी कैमिला पार्कर नवंबर 2013 में उत्तराखंड आए थे तो यहां उन्हें भी इसकी खीर परोसी गई थी। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी जब उत्तराखंड प्रवास पर गए थे तो उन्हें भी इसी की खीर परोसी गई थी। इस आहार का नाम है झंगोरा। इसका वैज्ञानिक नाम इक्निकलोवा फ्रूमेन्टेसी है। आम बोलचाल की भाषा में इसे श्याम का चावल कहा जाता है। झंगोरा का सेवन उत्तराखंड में आदिकाल से होता रहा है। कुछ प्राचीन ग्रंथों में भी इसका वर्णन किया गया है। अब आपको ये भी जानना जरूरी है कि आखिर इसमें ऐसे कौन कौन से पौष्टिक पदार्थ होते हैं ? साथ ही ये भी जानिए कि इसकी स्वादिस्ट खीर को कैसे तैयार किया जाता है।

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राष्ट्रीय पोषण संस्थान ने एक रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक झंगोरा में कच्चे फाइबर की मात्रा 9.8 ग्राम होती है, जो कि पेट के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है। इसके अलावा इसनेम 65.5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर की वृद्धि के लिए जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। इसके अलावा इसमें 6.2 ग्राम प्रोटीन होता है। 2.2 ग्राम वसा , 4.4 ग्राम खनिज , 20 मिलीग्राम कैल्शियम, 5 मिलीग्राम आयरन और 280 ग्राम फास्फोरस पाया जाता है। आप समझ सकते हैं कि शरीर में जरूरी पोषक तत्व पहुंचाने के लिए झंगोरा कितना जरूरी है। यह सभी जानते हैं कि खनिज और फास्फोरस शरीर के लिये बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। झंगोरा में चावल की तुलना में खनिज, वसा और आयरन ज्यादा मात्रा में होता है। इसमें मौजूद कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है। इसके साथ ही इसमें अत्यधिक फाइबर होने की वजह से ये शुगर पेशेंट के लिए सबसे सही आहार है।

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खास बात ये है कि झंगोरा के सेवन से शरीर में शुगर कंट्रोल रहता है। सरकार ने अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाले पौषक आहारों में इसे शामिल भी किया है । झंगोरा की खेती उत्तराखंड में सदियों से की जा रही है और एक समय इसका इस्तेमाल चावल की जगह किया जाने लगा था। लेकिन बाद में चावल की बढ़ती पैठ की वजह से इसे मुख्य खाने से कम कर दिया गया। तमाम हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि चावल की तुलना में झंगोरा ज्यादा पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक आहार है। इसकी खेती के लिये ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ती है। झंगोरा की खीर बनाने से पहले दो घंटे इस भिगा कर रखें। इसके बाद कढ़ाई में घी डालकर नारियल का तड़का लगाकर छौंके और इसे धीमी आंच में भूनें। ध्यान रहे कि इसका हर दाना अलग-अलग हो जाए। इसके बाद इसमें खौलता दूध मिला लें। करीब 15 मिनट हल्की आंच में पकने के बाद किशमिश, काजू, बादाम डालकर खाया जा सकता है।


Uttarakhand News: Benefits of jhangora

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