Video: देवभूमि उत्तराखंड में 60 दशक पुरानी कुटिया, जिसका टिकट ताजमहल से भी महंगा है

Video: देवभूमि उत्तराखंड में 60 दशक पुरानी कुटिया, जिसका टिकट ताजमहल से भी महंगा है

Chaurasi kutiya of uttarakhand  - चौरासी कुटिया, उत्तराखंड न्यूज,उत्तराखंड,

क्या आप सोच सकते हैं कि किसी झोपड़ी का टिकट ताजमहल और अजंता ऐलोरा से भी महंगा हो सकता है ? लेकिन ऐसा है। आज हम जिस कुटिया के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, उसका दीदार भी काफी महंगा है। दुनिया के सात अजूबों में भले ही ताजमहल शामिल हो, लेकिन उसका टिकट महज 20 रुपये का है। इसके अलावा कुतुबमीनार, लालकिला और अजंता ऐलोरा से भी इसका टिकट महंगा है। उत्तराखंड के ऋषिकेश में मौजूद चौरासी कुटी के बारे में हम आपको बता रहे हैं। ये गुरू महर्षि महेश योगी की तपस्थली है। खास बात ये है कि दुनिया के सबसे बड़े बैंड में शुमार बीटल्स के गुरु महर्षि महेश योगी रह चुके हैं। यहां भारत के रहने वाले लोगों को दीदार के लिए 150 रुपये चुकाने पड़ते हैं, जबकि विदेश से आने वाले सैलानियों को 600 रुपये चुकाने पड़ते हैं। अब जरा आपको देश के बाकी स्थलों का भी किराया बता देते हैं।

यह भी पढें - Video: उत्तराखंड बनाएगा नया रिकॉर्ड, लंदन से भी बेहतर हो गई टिहरी...देखिए
यह भी पढें - Video: उत्तराखंड के इस मंदिर में हुई थी शिवजी और मां पार्वती की शादी, फिर मनाई गई शिवरात्रि !
चौरासी कुटी के लिए भारतीयों को 150 रुपये एंट्री फीस देनी पड़ती है, जबकि विदेशियों को 600 रुपये अदा करने पड़ते हैं। अजंता ऐलोरा की गुफा के लिए भारतीयों को 10 रुपये एंट्री फीस देनी होती है, तो विदेशियों को 250 रुपये अदा करने पड़ते हैं। ताज के दीदार के लिए भारतीयों को 20 रुपये और विदेशियों को 700 रुपये देने पड़ते हैं। कुतुबमीनार के दीदार के लिए भारतीयों को 10 रुपये और विदेशियों को 250 रुपये एंट्री फीस देनी पड़ती है। लालकिला देखने के लिए भारतीयों को 10 रुपये और विदेशियों को 250 रुपये देने पड़ते हैं। हवामहल के लिए भारतीयों को 10 रुपये तो विदेशियों को 50 रुपये देने पड़ते हैं। खजुराहो के लिए भारतीयों की एंट्री फ्री है, लेकिन विदेशियों को 450 रुपये देने पड़ते हैं। चौरासी कुटी की स्थापना 60 दशक पहले की गई थी। ये झोपड़ी करीब 15 एकड़ एरिया में फैली हुई है।

यह भी पढें - उत्तराखंड में घूमने आई थी जर्मनी की अमीर लड़की...पहाड़ों रही और सरस्वती माई बन गई
यह भी पढें - उत्तराखंड के सिद्धबली धाम के बारे में आप ये बात जानेंगे, तो हनुमान जी की भक्ति में खो जाएंगे
इसकी स्थापना महर्षि योगी ने ही की थी। ये कुटिया वास्तुलकला का बेजोड़ नमूना है। बीटल्स ग्रुप के जॉन लेनन, जॉर्ज टेरिसन, पॉल नकार्टनी करीब 50 साल पहले यहां आए थे। ये ग्रुप करीब 1 साल तक यहीं रहा था और यहीं से उन्होंने दीक्षा प्राप्त की थी। साल 1983 में चौरासी कुटी को राजाजी नेशनल पार्क में शामिल किया गया। इसके बाद यहां पर्यटकों की गतिविधि को सीमित कर दिया गया। धीरे धीरे ये जगह वीरान हो गई। साल 2015 इस कुटी को लोगों के लिए दोबारा खोला गया था। यहां का शुल्क काफी ज्यादा रखा गया था। प्रवेश शुल्क यानी एंट्री फीस के मामले मे ये देश का सबसे महंगा स्थल है। बताया जाता है कि बीते एक साल से यहां पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। एक आंकड़ा कहता है कि बीते एक साल के दौरान यहां 16216 पर्यटक आए। इनसे 22 लाख 23 हजार 630 रुपये की कमाई हुई।

YouTube चैनल सब्सक्राइब करें -

Uttarakhand News: Chaurasi kutiya of uttarakhand

Content Disclaimer (Show/Hide)
लेख शेयर करें