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सिर्फ पहाड़ों में पाई जाती है ये बेशकीमती जड़ी-बूटी, जो आपको एक झटके में लखपति बना देगी!

सिर्फ पहाड़ों में पाई जाती है ये बेशकीमती जड़ी-बूटी, जो आपको एक झटके में लखपति बना देगी!

Information about keeda jadi in uttarakhand  - उत्तराखंड न्यूज, कीड़ा जड़ी

क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर के हर रोग का इलाज सिर्फ एक जड़ी-बूटी है। वैज्ञानिक भी इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं । इसलिए वो लगातार इस पर रिसर्च भी कर रहे हैं। इस जड़ी का नाम है कीड़ाजड़ी। जी हां ये एक ऐसी जड़ी है, जिसकी बदौलत आपके शरीर में मौजूद हर बीमारी खत्म हो जाती है। खासतौर पर उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ये पाई जाती है। इसके सेवन से इंसान के शरीर में कई प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं। इस जड़ी को सिर्फ बर्फीले इलाकों में पाया जाता है। हालांकि उत्तराखंड की दिव्या रावत ने इसे अपनी लैब में उगाने में पहली बार सफलता हासिल की थी। आज दिव्या इससे अच्छी खासी कमाई भी कर रही हैं। अब आपको इसकी कीमत के बारे में भी बता देते हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि करीब 2 लाख रुपये किलो इसकी कीमत होती है। मई और जून में नेपाल के इलाकों में इसे इकठ्ठा करने की होड़ मच जाती है।

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सामान्य तौर पर समझें तो ये एक तरह का जंगली मशरूम है। इस जड़ी का वैज्ञानिक नाम कॉर्डिसेप्स साइनेसिस या फिर कॉर्डिसेप्स मिलिटरीज भी है। वनस्पतिशास्त्री कहते हैं कि इसमें प्रोटीन, अमीनो एसिड, पेपटाइड्स, विटामिन बी-1, बी-2 और बी-12 जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये तत्काल रूप में ताक़त देते हैं। पहाड़ी इलाकों में इसका दोहन भी हो रहा है और इसकी तस्करी भी की जाती है। फिलहाल इतना जरूर है कि एक जड़ी-बूटी से आपके स्वास्थ्य में जबरदस्त तरीके से वृद्धि हो जाती है। कहा जाता है कि कीड़ाजड़ी से बेहतर शक्तिवर्धक दवा कोई नहीं है। हिमालयी क्षेत्रों में तिब्बत और नेपाल में भी इसका कारोबार होता है। हालांकि इसके वास्तविक गुणों के बारे में कुछ एक लोग ही जानते हैं। हिमालयी क्षेत्रों में इसे कीड़ा-जड़ी कहा जाता है। उधर तिब्बत और चीन में इसे यार्सागुम्बा या यारसागम्बू कहा जाता है।

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प्राकृतिक इलाज के तौर पर इसका सबसे बेहतर इस्तेमाल किया जाता है। खास बात ये है कि इस जड़ी का कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता। आमतौर पर गंभीर रोगों के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसका इस्तेमाल सांस और गुर्दे की बीमारी में भी किया जाता है। साथ ही इसके बारे में कहा जाता है कि ये उम्र के असर यानी बुढ़ापे को भी बढ़ने से रोकता है। ये शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। इसके अलावा इसका उपयोग सांस और गुर्दे की बीमारी में भी होता है। यह बुढ़ापे को भी बढ़ने से रोकता है तथा साथ ही शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ाता है। दरअसल यार्सागुम्बा यानी कीड़ाजड़ी एक तरह का कीड़ा होता है। ये खास तरह के पौधों पर ही पैदा होता है। सर्दियों में इन पौधों से रस निकलता है और ये पैदा होते हैं। इसका जीवन 6 महीने का ही होता है।


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