पहाड़ की 16 साल की बेटी को सलाम... बन सकती हैं भारत की सबसे कम उम्र की पुरातत्वविद

पहाड़ की 16 साल की बेटी को सलाम... बन सकती हैं भारत की सबसे कम उम्र की पुरातत्वविद

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16 वर्ष की उत्तराखण्ड की बेटी, जो नैनीताल जनपद में आर्यमान विक्रम बिड़ला स्कूल में 11वीं की छात्रा है, ने पुरातात्विक खोज पर किताब लिख डाली है। महज 16 साल की उम्र में 11वीं की छात्रा जैनिस ने पुरातात्विक खोज पर आधारित किताब लिखी है और नाम दिया है 'अननोन मैन-इ'। आर्यमान विक्रम बिड़ला स्कूल में 11वीं की छात्रा जैनिस ने पुरातात्विक खोज पर आधारित किताब लिखी है और नाम दिया है 'अननोन मैन-इ'। जैनिस के पिता संजीव चौधरी नैनीताल जिले के लालकुंआ स्थित सेंचुरी पेपर मिल में अधिकारी हैं। जैनिस की यह पुस्तक मिस्र के पिरामिड में रखी ममी पर हो रहे शोध को लेकर है। जैनिस के अनुसार मिस्र में दुनियाभर के पुरातत्वविदों ने करीब 200 वर्षों तक रिसर्च की। रिसर्च में क्या निकला, इस पर अभी तक कोई किताब नहीं आई।

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जैनिस का कहना है कि इससे लोगों की जिज्ञासा बढ़ती गई। आगे जैनिस बताती हैं कि 'अननोन मैन-इ' नामक उनकी किताब इसी रहस्य को खोलती है। जैनिस को बचपन से ही पुरातात्विक खोज में रुचि थी। इस कारण पिछले एक साल से वह रिसर्च वर्क और किताब लिखने में जुटी थी। जैनिस की किताब 'अननोन मैन-इ' अमेजॉन, फ्लिपकार्ट और पोथी पर ऑनलाइन उपलब्ध है। किताब की ऑनलाइन कीमत 199 रुपये है। जैनिस ने बताया वह अपनी किताब को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज कराने भेजेंगी। मूल रूप से मुजफ्फरनगर की रहने वाली 16 वर्षीय जैनिस की यह पुस्तक मिस्र के पिरामिड में रखी ममी पर हो रहे शोध को लेकर है। उनका दावा है कि वह इंडिया की सबसे कम उम्र की पुरातत्वविद हैं।


Uttarakhand News: nainital girl to become youngest Archaeologist

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