Video: उत्तराखंड के इस मंदिर में हुई थी शिवजी और मां पार्वती की शादी, फिर मनाई गई शिवरात्रि !

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Triyuginarayan temple the place where lord shiva and maa parvati got married - उत्तराखंड न्यूज, त्रियुगीनाराण मंदिर ,उत्तराखंड,

महाशिवरात्रि का पर्व है, हर कोई भगवान शिव और मां पार्वती की भक्ति में डूबा हुआ है। कहा जाता है कि इस दिन महादेव का मन से ध्यान करने पर जिंदगी की तमाम परेशानियां दूर हो जाती हैं। एक मान्यता ये भी है कि शिवरात्रि के दिन मां पार्वती और शिवजी का विवाह हुआ था। कई प्रकांड पंडित ये भी कहते हैं कि इस दिन पहली बार भगवान शिव प्रकट हुए थे। खैर अगर दोनों बातों को सामने रखा जाए, तो कुछ ज्योतिष ये भी कहते हैं कि शिवरात्रि का पर्व देश और दुनिया में उत्तराखंड के त्रियुगीनारायण मंदिर की वजह से भी मनाया जाता है। दरअसल इस मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। ये मंदिर है रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। इस मंदिर में वो हवन कुंड आज भी मौजूद है, जिसकी अग्नि को साक्षी मानकर भगवान शिव ने मां पार्वती के साथ 7 फेरे लिए थे।

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वो हवन कुंड आज भी प्रज्वलित है। कहा जाता है कि इस हवन कुण्ड की राख, भक्तों के वैवाहिक जीवन को सुखी बनाती है। इस मंदिर में जल रही अखंड अग्निज्योति को शिवजी और मां पार्वती के विवाह वेदी की अग्नि कहा जाता है। तमाम लोग बताते हैं कि ये अग्नि त्रेतायुग से जल रही है। ये ही वजह है कि यहां हर साल सैकड़ों जोड़े विवाह बंधन में बंधते हैं। इस मंदिर के चप्पे-चप्पे पर महादेव और मां पार्वती की शादी के साक्ष्य नजर आते है। कहा जाता है कि इस विवाह के दौरान देवताओं ने अपनी अपनी शक्तियों से वेदी में विवाह की अग्नि पैदा की थी। इस अग्नि का नाम धनंजय दिया गया था। कहा जाता है कि त्रियुगीनारायण हिमावत की राजधानी थी। यहां भगवान शिव और मां पार्वती के विवाह में भगवान विष्णु ने पार्वती के भाई के रूप में रीतियों का पालन किया था। इस विवाह में ब्रह्मदेव पुरोहित बने थे।

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उस वक्त सभी संत-मुनियों ने इस समारोह में हिस्सा लिया था। विवाह स्थल के स्थान को ब्रहम शिला कहा गया है। ये मंदिर के ठीक सामने स्थित है। स्थल पुराण में आपको इस मंदिर का पूरा वर्णन भी मिल जाएगा। यहां तीन कुंड बने हैं जिन्हें विष्णु कुंड, रुद्र कुंड और ब्रह्मा कुंड कहा जाता है। कहा जाता है कि विवाह से पहले ही सभी देवताओं ने यहां स्नान किया था। इस मंदिर में मौजूद अग्नि कुंड की राख को आज भी लोग अपने घरों में ले जाते हैं, जिसे शुभ माना जाता है। खास बात ये भी है कि इस मंदिर में विष्णु भगवान को वामन देवता के रूप में पूजा जाता है।

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Uttarakhand News: Triyuginarayan temple the place where lord shiva and maa parvati got married

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