Video: देवभूमि के शक्तिपीठ में जब एक महिला ने लिया शक्ति अवतार, तो बंद हुई बलि प्रथा

Video: देवभूमि के शक्तिपीठ में जब एक महिला ने लिया शक्ति अवतार, तो बंद हुई बलि प्रथा

Story of laxmi devi who raised voice against Sacrificial practice’ - उत्तराखंड न्यूज, बलि प्रथा, लक्ष्मी देवी भट्ट,उत्तराखंड,

उत्तराखंड...जिसे देव भूमि के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि यहां कदम कदम पर देवी-देवता निवास करते हैं। इसी भूमि में कई वीरांगनाओं ने भी जन्म लिया है। वीर बाला तीलू रौतेली जैसी साक्षात दुर्गा अवतार नारी शक्ति, गौरा देवी जैसी पेड़ों को बचाने वाली सशक्त महिला, रानी कर्णावती जैसी रानी, जिसने मुगलों की नाक काट डाली थी। आज हम आपको एक और नारी शक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं। इस महिला ने हुंकार भरी तो चंद्रबदनी मंदिर में बलि प्रथा पर रोक लग गई। कहते हैं कि किसी भी काम को करने से पहले उसके लिए आवाज उठाना जरूरी है, मन में ढृढ़ निश्चय होना जरूरी है। उत्तराखंड के टिहरी जिले की वीरांगना लक्ष्मी देवी भट्ट ने बलि प्रथा के खिलाफ आवाज भी उठाई और बलि प्रथा पर रोक लगाकर ही दम लिया। इस काम में लक्ष्मी देवी का मार्गदर्शन गोविंद प्रसाद गैरोला और स्वामी मन्मथन ने किया था।

यह भी पढें - तीलू रौतेली: कत्यूरियों की काल...शक्ति का अवतार...पढ़िए..क्यों थामी थी हाथ में तलवार ?
गोविंद प्रसाद गैरोला और स्वामी मन्मथन बलि प्रथा के पूर्ण रूप से खिलाफ थे। इसके साथ ही बुरांसी देवी और शाकम्बरी देवी जैसी महिलाओं ने लक्ष्मी देवी का साथ दिया था। ये वो महिला हैं, जिन्होंने निरीह जानवरों के बदले अपना ही सिर बलि के रूप में चढ़ाने की बात कह डाली थी। एक बार लक्ष्मी देवी ने खुद ही ऐलान कर दिया था कि देवताओं को निरीह जानवरों की बलि क्यों चढ़ानी ? उन्होंने अपना ही सिर आगे कर लिया और कहा कि अगर बलि ही लेनी है तो मेरी बलि लीजिए। सभी अपने बयान पर कायम रहे। किसी की क्या मजाल कि कोई इन महिलाओं को हाथ भी लगा पाता। वो सभी नारियां उस मंदिर में शक्ति की तरह मौजूद थी और अडिग थी। कहा जाता है कि उस दिन के बाद से ही चंद्रबदनी मंदिर में बलि प्रथा को पूरी तरह से बंद कर दिया गया। लक्ष्मी देवी भट्ट टिहरी जिले के पूज्यार गांव की रहने वाली हैं।

यह भी पढें - देवभूमि की ज्वलंत नारी शक्ति को सलाम, गौरा देवी की ये कहानी युगों-युगों तक याद रहेगी
लक्ष्मी देवी के पिताजी का नाम श्री राम प्रसाद भट्ट और दादा जी का नाम बाला राम भट्ट है। ये सच है कि आज भी पहाड़ के कई धार्मिक स्थलों पर बलि प्रथा होती है। उत्तराखंड के पवित्र धाम चंद्रबदनी देवी मंदिर में भी कभी ऐसा होता था। लेकिन लक्ष्मी देवी भट्ट का मानना था कि ये रुकना चाहिए। इसके लिए उन्होंने ऐसा काम किया कि हर कोई हैरान रह गया। देवभूमि की महिलाओं को शक्ति का अवतार भी कहा गया है। लक्ष्मी देवी पर बना ये वीडियो भी देखिए। आप को खुद इस बात का अंदाजा हो जाएगा।

YouTube चैनल सब्सक्राइब करें -

Uttarakhand News: Story of laxmi devi who raised voice against Sacrificial practice’

Content Disclaimer (Show/Hide)
लेख शेयर करें