उत्तराखंड के 12 हजार गांवों के लिए बड़ी खबर, खत्म होगा 200 साल पुराना अंग्रेजों का कानून

उत्तराखंड के 12 हजार गांवों के लिए बड़ी खबर, खत्म होगा 200 साल पुराना अंग्रेजों का कानून

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उत्तराखंड के 12 हजार से ज्यादा गांवों के लिए एक अच्छी खबर है। आखिरकार हाईकोर्ट ने आदेश दे दिया है कि सदियों पुरानी राजस्व पुलिस व्यवस्था को खत्म कर दिया जाएगा। अगले 6 महीने के भीतर ये व्यवस्था खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार अब इस पर काम कर रही है। जिस दौरान अग्रेजों ने भारत पर राज किया था, उसी दौरान साल 1816 में कुमाऊं के तत्कालीन ब्रिटिश कमिश्नर ने पटवारियों के 16 पद सृजित किए थे। इन पटवारियों को पुलिस, राजस्व संग्रह और भू अभिलेख का काम सौंपा गया था। इसके बाद साल 1874 में पटवारी पद का नोटिफिकेशन जारी किया गया था। हालांकि उस दौरान टिहरी, देहरादून और उत्तरकाशी जैसी जगहों में रजवाड़े थे, तो इन जगहों पर पटवारी नहीं रखे गए थे। वक्त बीतता गया और साल 1916 में पटवारियों की नियमावली में आखिरी बार संशोधन हुआ था।

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इसके बाद 1956 में टिहरी, उत्तरकाशी, देहरादून जिलों के गांवों में भी पटवारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अंग्रेजों ने अपनी नीतियों के हिसाब से राजस्व वसूली और कानून व्यवस्था को संभालने के लिए पर्वतीय इलाकों में पटवारी के पद सृजित किए थे। आपको याद होगा कि कभी पटवारी की उत्तराखंड में अलग ही शान होती थी। अंग्रेजों के शासन से लेकर आज तक पहाड़ी जिलों में इसी व्यवस्था के मुताबिक काम चल रहा है। अब सवाल ये है कि आखिर कोर्ट में ये मामला कहां से आया। दरअसल ये 23 दिसंबर 2011 की बात है। जब टिहरी गढ़वाल के गांव गवाना पट्टी डागर के रहने वाले बचन दास ने राजस्व पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने कहा था कि ससुराल पक्ष ने उनकी बेटी रामेश्वरी को दहेज के लालच में मार डाला। 21 दिसंबर 2012 को इस केस में लोवर कोर्ट ने दोषी सुंदर लाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

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हाईकोर्ट में जब ये मामला आया तो कोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा। इसके साथ ही राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में राजस्व पुलिस का काम देख रहे पटवारियों के पुलिस अधिकार खत्म कर दिए। कोर्ट ने अब राज्य सरकार को 6 महीने का वक्त दिया है। इस अवधि में उत्तराखंड सरकार को पटवारी क्षेत्रों में रेगुलर पुलिस की व्यवस्था करनी होगी। 6 महीने के बाद राजस्व पुलिस में कोई भी एफआईआर दर्ज नहीं कराई जाएगी। कोर्ट ने कहा कि उत्तराखंड की आबादी एक करोड़ से ज्यादा है। आलम ये है कि राज्य में सिर्फ 156 थाने हैं। कोर्ट ने सरकार को 6 महीनों के भीतर थानों की संख्या बढ़ाने के लिए कहा है, जिससे अपराधों पर लगाम लगाई जा सकेगी। एक सर्किल में दो पुलिस स्टेशन होंगे। इसके अलावा थाने का संचालन सब इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी द्वारा किया जाएगा।


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