गैरसैंण में ऐतिहासिक फैसला, लाखों लोगों के लिए खुशखबरी, तबादला एक्ट पास

गैरसैंण में ऐतिहासिक फैसला, लाखों लोगों के लिए खुशखबरी, तबादला एक्ट पास

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आखिरकार त्रिवेन्द्र सरकार ने अपना एक बड़ा वादा पूरा किया है। गैरसैंण में चल रहे शीतकालीन विधानसभा सत्र के पहले दिन ही ऐतिहासिक फैसला किया है। आपको बता दें कि ये कानून उत्तराखंड की राजनीति को प्रभावित करने वाले बड़े मुद्दों में से एक रहा है। बीजेपी ने पहले ही साफ कर दिया था कि सबसे पहले इस मुद्दे पर बड़ा फैसला लिया जाएगा । प्रवर समिति ने इस कानून के प्रस्ताव को 15 जून को विधानसभा के पटल पर रखा था। आखिरकार गैरसैंण सत्र के पहले दिन ही इस पर मुहर लग ही गई। तालियों की गड़गड़ाहट के साथ ही सदन ने इसका स्वागत किया। उत्तराखंड के लाखों शिक्षक इसकी मांग कर रहे थे। इससे पहले प्रदेश के कर्मचारियों की परेशानियों को देखते हुए खंडूरी सरकार ने तबादला एक्ट बनाया था। बाद में कांग्रेस ने शासन में आते ही उस एक्ट को निरस्त कर दिया।

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इस विधेयक में राज्य में तबादलों के लिहाज से ग्राम स्तर तक के कार्मिकों की तैनाती के लिए सुगम और दुर्गम क्षेत्रों की परिभाषा जिलेवार तय की गई है। अब आपको इस एक्ट की खूबियां भी बता देते हैं। नए एक्ट में सुगम और दुर्गम दोनों के लिए दो-दो श्रेणी बनाई गई हैं। सुगम क्षेत्रों के लिए एक श्रेणी में टिहरी, चमोली, उत्तरकाशी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत और नैनीताल जिले के पर्वतीय क्षेत्रों के ऐसे कार्यस्थलों को जोड़ा गया है जो पक्के मोटर मार्ग पर अथवा पक्के मोटर मार्ग के आधा किलोमीटर की परिधि में हैं। दूसरी श्रेणी में देहरादून, पौड़ी, चंपावत, नैनीताल, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिले के मैदानी क्षेत्रों के ऐसे कार्य स्थलों को शामिल किया गया है जो पक्के मोटर मार्ग पर अथवा पक्के मोटर मार्ग से दो किमी की परिधि में स्थित हैं।

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इसी तरह दुर्गम क्षेत्रों की पहली श्रेणी में ऐसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है कि जो पक्के मोटर मार्ग के आधा किलोमीटर से ज्यादा पैदल दूरी पर स्थित हैं। दुर्गम क्षेत्रों की दूसरी श्रेणी में ऐसे कार्यस्थल रखे गए हैं जो पक्के मोटर मार्ग के दो किमी से अधिक पैदल दूरी पर स्थित हैं। इसमें पांच किलोमीटर और 10 किमी से ज्यादा पैदल दूरी और 7000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित कार्यस्थल पर एक साल की तैनाती को दो साल की दुर्गम तैनाती के समान माना जाने का प्रावधान किया गया है। अब खुशखबरी ये है कि त्रिवेंद्र सरकार ने गैरसैंण में हुए सत्र में इस एक्ट को पास कर दिया है। उत्तराखंड में काफी वक्त से इस एक्ट को पास कराने को लेकर मांग उठ रही थी, जो पूरी कर दी गई है।


Uttarakhand News: Tabaadla act passed in gairsain

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