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Image: Mamta Pujari becomes the first commercial female driver of Uttarkhand

गुप्तकाशी की ममता पुजारी बनीं उत्तराखण्ड की पहली कमर्शियल महिला ड्राइवर, ज़ज्बे को प्रणाम !

गुप्तकाशी की ममता पुजारी बनीं उत्तराखण्ड की पहली कमर्शियल महिला ड्राइवर, ज़ज्बे को प्रणाम !

पहाड़ियों की मातृशक्ति का पूरी दुनिया लोहा मानती है... उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग जनपद के गुप्तकाशी की एक बेटी है ममता पुजारी। गाड़ी चलाने के शौक को इस दिलेर पहाड़ी बेटी ने अपना पेशा बनाया, जिसके चलते उत्तराखंड को पहली कॉमर्शियल महिला ड्राइवर मिल गई है। उन्हें यह अवसर सहेली ट्रस्ट की ओर से मिला है। सहेली ट्रस्ट की ओर से रुद्रप्रयाग में जल्द ही महिला कैब सेवा को प्रारंभ करने का प्रयास भी किया जा रहा है। फिलहाल ममता सहेली ट्रस्ट में काम कर रही लड़कियों को लाने और ले जाने का काम कर रही है। वर्तमान में वह संस्था की ही वैन चलाती हैं। ममता ने भी अपनी इच्छा जताई है कि सरकार इसे सम्बन्ध में अपने स्तर भी पहल करें तो पूरे उत्तराखण्ड राज्य में लड़कियों की सुरक्षा को बेहतर बनाने के प्रयास किये जा सकते हैं। उत्तराखण्ड में भी लड़कियों और महिलाओं के लिए अन्य राज्यों की तरह कैब सेवा शुरू की जा सकती है, जिसमें एक महिला ही चालक हो।

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कहते हैं कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता... कोई ऐसा काम जिससे आप एक मिसाल बन जाओ उसे सीखने में तो कत्तई कोई हर्ज नहीं है। रुद्रप्रयाग के गुप्तकाशी कस्बे के पास ही केदारनाथ रोड पर एक गाँव है नारायणकोटि। ममता पुजारी वहीँ की निवासी हैं। राजकीय इन्टर कॉलेज गुप्तकाशी से नारायणकोटि थोड़ी दूर है तो ममता बहुत कम उम्र में ही स्कूल पहुँचने के लिए उन पहाड़ी रास्तों पर दुपहिया वहां चलाती थीं जिन रास्तों पर अच्छे-अच्छों का दिमाग चकराने लगता है। ममता उत्तराखण्ड की पहली कॉमर्शियल महिला ड्राइवर होंगी। ममता पुजारी का कहना है कि महिलाओं और लड़कियों को कैब में सुरक्षा मिलने के साथ ही महिला चालक के फील्ड में आने का मौका मिलेगा। तेतीस वर्षीया ममता कहती हैं कि कोई भी काम छोटा-बड़ा नहीं होता। बतौर ममता मुझे कॉमर्शियल महिला ड्राइवर बनने में बेहद खुशी हो रही है।

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वैसे भारत के अन्य राज्यों के कई शहरों में महिला ड्राइवर हैं, परन्तु उत्तराखण्ड राज्य में पहली बार यह देखने में आया है जब एक महिला पहाड़ों में कैब चलाएगी। रुद्रप्रयाग जनपद में सहेली ट्रस्ट की ओर से यह पहल की गई है। ममता बताती है कि उन्हें शुरू से गाड़ियां चलाने का शौक रहा है। नौकरी के अभाव में जब उन्हें ड्राइवर की नौकरी का पता चला तो उन्होंने आवेदन किया और उन्हे जॉब मिल गयी। ममता कहती हैं कि उनके पिता ने उनका समर्थन करते हुए उन्हें यह जॉब करने की सलाह दी और ममता ने महिलाओं के लिए एक मिसाल पेश करते हुए राज्य में पहली बार कॉमर्शियल वैन चलाना शुरू किया है। राज्य समीक्षा की ओर से ममता को उज्जवल भविष्य की शुभकामनायें।

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