देहरादून से टिहरी, अल्मोड़ा से रुद्रप्रयाग, पौड़ी से नैनीताल, हर उत्तराखंडी इस बात से परेशान !

देहरादून से टिहरी, अल्मोड़ा से रुद्रप्रयाग, पौड़ी से नैनीताल, हर उत्तराखंडी इस बात से परेशान !

Monkeys are becoming big tension for every uttarakhandi  - उत्तराखंड न्यूज, बंदरों का आतंक ,उत्तराखंड,

उत्तराखंड का हर जिला, खासतौर पर पहाड़ के इलाके, इन इलाकों में रहने वाले हर पहाड़ी आज एक बात से परेशान है। भले ही उत्तराखंड का 71 फीसदी वन भूभाग हो। भले ही उत्तराखंड वन्यजीव विविधता के लिए दुनियाभर में मशहूर हो, लेकिन ये एक कड़वा सच है कि हर कोई बंदरों के आतंक से परेशान है। आपको हम कुछ आंकड़ों से रू-ब-रू कराएंगे तो आप और भी ज्यादा हैरान परेशान रह जाएंगे। आज आलम ये है कि हर उत्तराखंडी बंदरों से बेहद परेशान है। राज्य समीक्षा आपको इसका एक उदाहरण भी दे रहा है। चमोली जिले के किसान राकेश बिष्ट बताते हैं कि इस बार उन्होंने संतरों यानी माल्टा का बिजनेस करने का मन बनाया था। इसके लिए उन्होंने बकायदा 10 हजार माल्टे की पौध लगाई थी। जब फल पकने का वक्त आया तो राकेश खुश थे कि उनके उगाए हुए माल्टे देश विदेशों में उत्तराखंड का मान बढ़ाएंगे।

उम्मीद थी कि इस बार 10 क्विटंल से ज्यादा माल्टे शहरों में भेजे जाएंगे। लेकिन हैरानी की बात ये है कि 3 क्विंटल ही माल्टे बाजार में बेटने के लिए लाए गए। बाकी माल्टे बंदर चट कर गए। अब ऐसे में कोई क्या करे। कोई अपने रोजगार के लिए खेती या फिर किसानी पर भई कैसे भरोसा करे ? अब जरा कुछ आंकड़ों के बारे में जानिए। आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड के तराई पूर्वी इलाको में करीब 9963 बंदर हैं। इसके अलावा अल्मोड़ा में 9477, रामनगर में 8400, नैनीताल में 7500, तराई पश्चिमी में 7100, टिहरी में 7020, कालसी में 6900, देहरादून में 4900, चमोली में 3800, रुद्रप्रयाग में 4000 के करीब बंदर हैं। फसलों और फलों को बर्बाद करना तो छोड़िए, ये बंदर आप जानलेवा भी साबित हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों के लिए ये आफत का सबब बन गए हैं।

इन पर नियंत्रण करने के लिए वन विभाग के पसीने छूट रहे हैं। हाल ये है कि 2015 से चल रही बंदर बंध्यीकरण योजना में अब तक करीब 1200 बंदरों की ही नसबंदी हो पाई है। यहां तक कि दो प्रस्तावित बंदरबाड़े भी अस्तित्व में नहीं आ पाए हैं। भले ही आपको ये एक छोटी सी परेशानी नजर आए, लेकिन ऐसा नहीं है। ये समस्या अब इतनी विकराल हो रही है कि हर कोई परेशान है। वन विभाग ने एक सर्वे कराया तो पता चला राज्य में बंदरों की संख्या 1.46 लाख है। इसके बाद भी बंदरों पर काबू करने के लिए उपाय नहीं हो पाए। खास बात ये है कि विभाग के पास ही बंदर पकड़ने के लिए ट्रेंड कार्मिकों की कमी है। एक बंदर को पकड़ने में 200 से 480 रुपये तक खर्चा आता है। हालांकि अब विभाग कह रहा है कि बंदर पकड़ने के लिए लोगों को ट्रेनिंग दी जा रही है। देखना है कि आगे क्या क्या होता है।


Uttarakhand News: Monkeys are becoming big tension for every uttarakhandi

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