Video: पहाड़ों में भोलेनाथ का मंदिर, यहां हर साल गिरती है बिजली, हर साल टूटता है शिवलिंग !

Video: पहाड़ों में भोलेनाथ का मंदिर, यहां हर साल गिरती है बिजली, हर साल टूटता है शिवलिंग !

Bijli mahadev of himachal pradesh  - शिवलिंग, बिजली महादेव, हिमाचल प्रदेश,उत्तराखंड,

पहाड़ों में कई जगहें ऐसी हैं, जिनके बारे में मान्यताएं जानकर आप हैरान रह जाएंगे। आज हम आपको एक ऐसी ही जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में जानकर आप दंग रह जाएंगे। इतना जान लीजिए कि पहाड़ों में एक मंदिर बना है, जहां हर साल बिजली गिरती है। मान्यता है कि भगवान शिव इस बिजली को अपने ऊपर ले लेते हैं। इससे मंदिर का कुछ भी नहीं बिगड़ता। कहा जाता है कि हर साल यहां बिजली गिरती है और हर बार यहां शिवलिंग टूट जाता है। भगवान शंकर का ये मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्‍लू में मौजूद है। इस मंदिर का नाम बिजली महादेव है। यहां ब्यास और पार्वती नदी के संगम के पास एक ऊंचे पर्वत के ऊपर ये मंदिर स्थित है। कहा जाता है कि बिजली महादेव बेहद ही प्राचीन मंदिर है। हर साल यहां बिजली गिरती है और कहा जाता है कि महादेव इस बिजली को अपने ऊपर ले लेते हैं।

हैरानी की बात तो ये है कि हर साल यहां बिजली तो गिरती है लेकिन इस मंदिर का कुछ भी नहीं बिगड़ता। हर बार यहां बिजली गिरनी से शिव लिंग खंडित हो जाता है। इसके पीछे एक मान्यता भी है। कहा जाता है जिस पहाड़ी पर ये मंदिर बना है, वो पहाड़ कुलान्त नाम के राक्षस का शरीर है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक एक बार कुलांत राक्षस अजगर का रूप धरकर व्‍यास नदी के किनारे कुंडली मारकर बैठ गया। इस वजह से नदी का पानी रुक गया और गांव डूबने लगा। इसके बाद भगवान शिव ने लोगों की भलाई के लिए कुलान्त राक्षस का वध किया। इस वध के बाद राक्षस के शरीर ने पहाड़ का रूप धर दिया। जब राक्षस का शरीर पहाड़ में तब्दील हुआ तो भगवान शिव ने इंद्र देव से कहा कि यहां हर साल बिजली गिराएं। स्थानीय लोग हर साल इस मंदिर में बिजली गिरती देखते हैं।

हर बार बिजली गिरने से यहां मौजूद शिव लिंग चकनाचूर हो जाता है। इसके बाद इस शिव लिंग को पुजारियों द्वारा मक्खन से जोड़ दिया जाता है और शिवलिंग अपने पुराने रूप में आ जाता है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि भगवान शिव नहीं चाहते थे कि बिजली गिरे तो इससे लोगों को नुकसान हो। इस वजह से लोगों को बचाने के लिए वो खुद अपने ऊपर बिजली गिरवाते हैं। इसी वजह से भगवान शिव को यहां बिजली महादेव कहा जाता है। कुल्लू से बिजली महादेव की पहाड़ी सात किलोमीटर दूर है। मान्यताओं के बीच बिजली गिरने का वैज्ञानिक कारण कुछ और भी कहा जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये मंदिर पहाड़ी पर काफी ऊंचाई पर है। ऐसी जगहों पर बिजली गिरने की संभावना ज्यादा रहती है। लेकिन कुछ वैज्ञानिक हैं, जिनका कहना है कि पहाड़ों पर कई मंदिर बसे हैं, सिर्फ इस मंदिर में ही बिजली क्यों गिरती है ?

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Uttarakhand News: Bijli mahadev of himachal pradesh

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