Video: देवभूमि के ‘जाख’ देव...जो दहकते अंगारों पर चलते हैं, दुनिया करती है प्रणाम..देखिए

आ देवभूमि के उस शक्ति के बारे में जान लीजिए...जिन्हे स्थानी भाषाओं में जाख राजा, भूम्याल देवता...या फिर स्थान देवता कहा जाता है। देखिए वीडियो

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उत्तराखंड की धरती में बसे पहाड़ और यहां की मान्यताएं आपको हर पल हर वक्त आकर्षित करती रहेंगी। जिस बारे में आप सोच नहीं सकते, ऐसे चमत्कार आपको इस धरती पर दिखेंगे। ऐसे ही उत्तराखंड में बेहद अद्भुत मंदिर है जाख देवता का। जाख देता को स्थानीय भाषा में नगर रक्षक या क्षेत्रपाल भी कहा जाता है। यानी वो देवता जो हर पल, हर वक्त अपनी नजर अपने क्षेत्र और क्षेत्रवासियों पर बनाए रखते हैं। त्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में बसा है गुप्तकाशी। गुप्तकाशी मेन बाजार से जाख राजा का मंदिर करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित है। हरे भरे जंगलों के बीच का सफर और फिर सामने जाख देवता का अलौकिक मंदिर आपको एक अलग ही दुनिया में लिए जाता है। अब आपको एक खास बात बता रहे हैं। वो बात , शायद जिसपर आपको एक पल के लिए विश्वास नहीं होगा।

आपको विश्वास हो इसलिए हम सबूत के तौर पर ये वीडियो भी लेकर आए हैं। अप्रैल के महीने में कौथिग होता है। कई दिन से जलती लकड़ियां जब अंगार बन जाती हैं, तो आप समझ सकते हैं कि उन अंगार की तपन कितनी खतरनाक होती है। करीब 5 मीटर के क्षेत्रफल में दहकते अंगारे और इन अंगारों केै पास जाने की कोई सोच भी नहीं सकता। इन अंगारों की तपन इतनी जबरदस्त होती है कि 5 मीटर दूर से ही आप इसे महसूस कर सकते हैं। लेकिन इन्हीं अंगारों में जब जाख देवता नंगे पैर चलते हैं, तो विज्ञान वहीं खत्म हो जाता है। सारी की सारी बातें धरी रह जाती हैं। मन में आस्था का ज्वार फूटता है और मन खुद से ही सवाल पूछता है कि ये कौन सी धरती है जहां हम आ गए। दहकते अंगारों के बीच बाबा जाख को चलते देखना सौभाग्य कहा जाता है।

इसके साथ ही यहां कुछ विचित्र घटनाएं होती हैं। जाख राजा को बारिश का देवता भी कहा जाता है। कहा जाता है कि जब भी यहां कौथिग होता है और जैसे ही जाख देवता अंगारों के बीच भक्तों को अपना रूप दिखाते हैं तो इसके तरंत बाद बारिश शुरू हो जाती है। जाख देवता को अंगारों पर नाचते देखघने के लिए हजारों लोगों की भीड़ जमा होती है। हर कोई ये खुली आंखों से देखता है। कोई इस बात को नकार नही सकता कि ये सब किसी प्लानिंग के तहत होता है। बीच में यहां कई वैज्ञानिक शोध कर चुके हैं। कहा जाता है कि अल्मोड़ा के कसार देवी मंदिर की तरह ही यहां एक शक्ति पुंज विचरण करता है। साल 2002 में अमेरिका की मेसाच्युसेट्स यूनिवर्सिटी से आए शोधकर्ता यहां शोध कर चुके हैं।ये शोधकर्ता बता चुके हैं कि उत्तराखंड में दो जगह GOD पार्टिकल मिले हैं। इनमें से पहला कसार देवी का मंदिर है और दूसरा जाख देवता हैं।

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Uttarakhand News: Jaakh devta in rudraprayag

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