(पार्ट 4) पड़ताल : समाज कल्याण विभाग में घोटालों का सच

(पार्ट 4) पड़ताल : समाज कल्याण विभाग में घोटालों का सच

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समाज कल्याण विभाग उत्तराखण्ड की छात्रवृत्ति योजना से सम्बंधित करोड़ों के घोटालों की हमारी पड़ताल के चतुर्थ संस्करण में आज हम छात्रवृत्ति योजनाओं में शैक्षणिक संस्थाओं, समाज कल्याण विभाग तथा छात्रों की भूमिका पर बात करेंगे । “राज्य समीक्षा” ने जनपद स्तरों पर जा कर गहनता से पड़ताल की तो पता लगा कि मीडिया में प्रकाशित छात्रवृत्ति योजनाओं में विगत 4-5 वर्षों में गड़बड़ियों की ज्यादातर ख़बरें निजी तकनीकी सस्थाओं की हैं । मीडिया में प्रकाशित ख़बरों के अनुसार निजी तकनीकी सस्थाओं में छात्रवृत्ति के लिए किये गए आवेदनों में कुछ आवेदन ऐसे विद्यार्थियों के हैं जो शैक्षणिक सस्थाओं में अध्ययनरत ही नहीं हैं । यहाँ यह तथ्य जानने योग्य है कि छात्रवृत्ति आवेदन करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तिगत अभिलेख जैसे बैंक खाता संख्या, आधार, हाईस्कूल प्रमाण पत्र आदि की आवश्यकता होती है जो कि केवल सम्बंधित छात्रों के पास ही उपलब्ध होते हैं । यदि किसी छात्र के इन व्यक्तिगत अभिलेखों का किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दुरपयोग किया जाता है तो छात्रों को ऐसे मामलों की शिकायतें विभागीय उच्चाधिकारियों अथवा सरकार से करनी चाहिए तथा ऐसे अपराधियों पर कठोर कार्यवाही होनी चाहिए ।

“राज्य समीक्षा” को यह भी पता लगा है कि वर्ष 2014 से निजी तकनीकी शैक्षणिक संस्थाओं में अध्ययनरत छात्रों के द्वारा स्वयं ही अपना छात्रवृत्ति का आवेदन ऑनलाइन भरा जाता है एवं छात्र द्वारा ऑनलाइन आवेदन के साथ स्वयं के दस्तावेज ऑनलाइन संलग्न किये जाते हैं । साथ ही प्रत्येक छात्र को एक ऑनलाइन लॉगइन पासवर्ड मिलता है जो गोपनीय प्रवृति का होता है तथा जो केवल छात्र द्वारा ही उपयोग में लाया जा सकता है । छात्रों के इन ऑनलाइन आवेदनों तथा अभिलेखों को सम्बंधित शैक्षणिक संस्थानों द्वारा जांच के उपरान्त छात्रवृत्ति का प्रस्ताव ऑनलाइन समाज कल्याण के सम्बंधित जनपद कार्यालय को प्रेषित किया जाता है । सम्बंधित समाज कल्याण कार्यालय द्वारा सम्बंधित छात्र को शुल्क प्रतिपूर्ति तथा छात्रवृत्ति की धनराशि कोषागार के माध्यम से छात्र के व्यक्तिगत बैंक खाते में ऑनलाइन भेजी जाती है। तकनीकी शैक्षणिक संस्थानों में छात्र अध्ययनरत है या नहीं, यह सम्बंधित संस्थान तथा तकनीकी शिक्षा विभाग से सुनिश्चित होता है । यह जानकारी प्राप्त हुई है कि तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा 75% उपस्थिति होने पर ही छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाती है । अतः यह कहना तर्क संगत प्रतीत नहीं होता कि ऐसे विद्यार्थियों द्वारा भी छात्रवृत्ति हेतु आवेदन जाता है जो शैक्षणिक संस्थाओं में अध्ययनरत ही नहीं हैं । विगत समय में यह खबर भी मीडिया में जोर-शोर से प्रकाशित हुई कि निजी शैक्षणिक संस्थानों द्वारा विद्यार्थियों से Withdrawal Form या Cheque को अग्रिम रूप से ले लिया जाता है । हमारे विचार में शैक्षणिक संस्थानों द्वारा छात्र को नि:शुल्क प्रवेश देने के उपरान्त यदि ट्यूशन फीस ही शुल्क-प्रतिपूर्ति के रूप में ली जाती है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है । यदि शैक्षणिक संस्थान, समाज कल्याण विभाग द्वारा छात्र को प्रदत छात्रवृत्ति की धनराशी ट्यूशन फीस के अतिरिक्त (जो अनुमनित रूप से 5000 तक होती है) ले लेते हैं, तो निश्चित रूप से ऐसे शैक्षणिक संस्थानों की शिनाख्त कर सरकार को उन पर कार्यवाही करनी चाहिए ।

विगत समय में मीडिया में यह तथ्य भी प्रकाशित हुए हैं कि शैक्षणिक संस्थानों द्वारा विचौलियों के माध्यम से छात्रों का Admission कराया जाता है तथा छात्रों को समाज कल्याण विभाग से मिलने वाली छात्रवृत्ति को बिचौलियों द्वारा हड़प लिया जाता है । “राज्य समीक्षा” ने जनपद स्तर पर जब इस सम्बन्ध में पड़ताल की तो यह पता लगा कि ऐसी कोई भी शिकायत किसी भी छात्र द्वारा अथवा छात्र के अभिभावक द्वारा नहीं की गयी है । साथ ही किसी भी छात्र के documents का यदि किसी बिचौलिए द्वारा दुरपयोग किया गया है तो ऐसे छात्रों एवं अभिभावकों को इस सम्बन्ध में विभाग अथवा सरकार से शिकायत करनी चाहिए । कानूनी रूप से यदि कोई छात्र अपने दस्तावेज किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध करता है तो उसके लिए सम्बंधित छात्र दोषी माना जाता है, क्षेत्रीय मीडिया को भी चाहिए कि वह ऐसी घटनाओं को सही दृष्टिकोण एवं तथ्यों के साथ प्रकाशित करे ताकि ऐसी घटनाओं में दोषियों की पहचान कर इन घटनाओं को रोका जा सके । “राज्य समीक्षा” की पड़ताल में आश्चर्यजनक रूप से यह तथ्य सामने आया है कि कुछ विभागीय अधिकारियों द्वारा, जिन पर विभागीय स्तर पर वर्तमान में कई जाचें चल रही हैं तथा जो कुछ मामलों में दण्डित भी हुए हैं, ऐसे कार्मिकों के द्वारा द्वारा मीडिया को भ्रामक सूचनायें देकर विभाग एवं सरकार की छवि को ख़राब किया जा रहा है । मा० मुख्यमंत्री एवं मा० समाज कल्याण मंत्री को चाहिए कि ऐसे व्यक्तियों/कार्मिकों को चिह्नित करते हुए कार्यवाही करें, ताकि विभाग तथा सरकार की छवि बनी रहे ।

अभावग्रस्त, गरीब तथा जरूरतमंद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़ी जाति के छात्रों की छात्रवृत्ति वितरण ना होने के कारण इन छात्रों में कुंठा उत्पन्न हो रही है, कई संगठनों द्वारा विभागीय दफ्तरों का घेराव किया जा रहा है । वर्ष 2014-15, 2015-16 तथा 2016-17 में छात्रवृत्ति की जांचों के नाम पर छात्रवृत्ति पाने से वंचित रहे पात्र छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है । मा० मुख्यमंत्री एवं मा० समाज कल्याण मंत्री द्वारा यदि छात्रवृत्ति आवंटन/वितरण हेतु तत्काल सुदृढ़ कदम नहीं उठाये गए तो यह गरीब तथा जरूरतमंद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़ी जाति के पात्र छात्रों के साथ अन्याय होगा ।


Uttarakhand News: the truth behind 100 cr scholarship scam part 4

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