पहाड़ों में बसा है दुनिया का सबसे हैरतंगेज गांव, यहां राक्षसी बोली में बात होती है !

पहाड़ों में बसा है दुनिया का सबसे हैरतंगेज गांव, यहां राक्षसी बोली में बात होती है !

Malana village of himachal  - पहाड़ी गांव, मलाणा, pahadi village, malana,उत्तराखंड,

मलाणा, हिमाचल राज्य की कुल्लू घाटी के उत्तर पूर्व में स्थित एक प्राचीन गांव है। ये गांव पार्वती घाटी में चंद्रखानी और देओटिब्बा नाम की पहाडियों से घिरा हुआ मलाणा नाले के किनारे स्थित है। मलाणा गांव आधुनिक दुनिया से अप्रभावित है और इस गांव में रहने वाले लोगों की अपनी जीवन शैली और सामाजिक सरंचना है। यहां के लोग अपने रीति-रिवाजों का बड़ी सख्ती से पालन करते हैं। इस गाँव पर बहुत सी डाक्यूमेंट्रीज, जैसे कि Malana: Globalization of a Himalayan Village, और Malana, A Lost Identity बनी हुई हैं। मलाणा भारतवर्ष का एक ऐसा गांव है जिसका अपना ही अस्तित्व है । ये जमदग्नि ऋषि का पवित्र स्थान है । कहा जाता है कि यहां बाणासुर का राज्य था। साथ में वो पूरे हिमालय की चोटियों पर राज करता था। अचानक महाऋषि जमदग्नि का पाला बाणासुर से पड़ गया और दोनों राज्य के पीछे झगड़ने लगे। बाणासुर ने घोर युद्ध की बात कही। बाणासुर जानता था कि वो शक्तिशाली है और ऋषि उससे हार जाएंगे।

बाणासुर ने ऋषि जमदग्नि से एक शर्त रखी कि जो इस युद्ध में हारेगा उसे इस जगह को छोड़ना होगा। शर्त मंजूर हो गयी। सालों बीत गये युद्ध होता रहा। युद्ध में बाणा सुर हार गया। बाणा सुर युद्ध हार गया और ऋषि जमदग्नि से क्षमा याचना करने लगा। बाणासुर कहने लगा कि हे प्रभु ! मुझे माफ़ करो अब जाने की इजाजत दो। तब ऋषि जमदग्नि ने कहा कि मांगो क्या चाहते हो। बाणासुर ने कहा प्रभु मझे और कुछ नहीं चाहिये केवल एक वचन दो कि यहाँ जब कोई गाँव बसे तो मेरे द्वारा बोली जाने बाली भाषा इस गाँव के लोग बोलें। इसके बाद बाणासुर चला गयाष बताया जाता है कि इस गांव में आज भी वो ही राक्षसी भाषा बोली जाती है। ये भारत का ऐसा पहला गाँव है जहाँ इन लोगों का अपना प्रशासन है। यहां कोई भी फैंसले देव नीति से किये जाते हैं और अपने ही कानून अपनाये जाते हैं ,यहाँ देव नीति के तीन सदन है ऊपरी सदन ,निचला सदन और मध्य सदन। इस मलाणा गांव का अपना ही लोकतन्त्र है और कहा जाता है कि इस पर सरकार भी दखलंदाजी नही करती।

मलाणा जिला कुल्लू से 45 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है और मनिकरण, जरी से लगभग 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मलाणा गाँव चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है कहा जाता है कि जिसकी मनोकामना कभी पूरी ही नही हुई इस पवित्र स्थान पर जाकर पूरी होती है। बताया जाता है कि यहां के लोग खुद को सिकन्दर का वंशज भी मानते हैं। सिकन्दर के जख्मी सैनिक यहां छूट गये थे जो वहीं बस गये । ये बात रिसर्च से सिद्ध हो चुकी कि यहां के लोग ग्रीस वालों से मिलते जुलते हैं। बादशाह अकबर भी इस गांव को अपने अधीन नहीं कर पाया था और उसने जमलू देवता से माफी मांगी थी। इसलिए इस गांव में अकबर की पूजा भी की जाती है। हैरानी की बात ये है कि इस गांव में कोई होटल नहीं है । यात्रियों को टैण्ट पर रहना पडता है। दुकान से सामान भी लेना है तो बाहर चौक में जमीन में पैंसे रखने पडेंगे। यहां की और भी अजीबोगरीब परम्पराएं हैं| मलाणा के निवासी अपने आप को हर हाल में श्रेष्ठ मानते हैं और बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति को घर, पूजा-स्थलों, स्मारकों, कलाकृतियों या दीवारों को छूने की इजाजत नहीं देते।


Uttarakhand News: Malana village of himachal

Content Disclaimer (Show/Hide)
लेख शेयर करें