उत्तराखंड ने तैयार किया एक और बड़ा रिकॉर्ड, सीएम त्रिवेंद्र ने दी ये खुशखबरी !

उत्तराखंड ने तैयार किया एक और बड़ा रिकॉर्ड, सीएम त्रिवेंद्र ने दी ये खुशखबरी !

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देवभूमि उत्तराखंड को यूं ही देवताओं की भूमि नहीं कहा जाता है। यहां कण कण में भगवान बसे हैं और पूरी दुनिया ये बात जानती है। इसीलिए पूरी दुनिया देवभूमि को नमन करने दौड़ी चली आती है। खासकर सावन के महीने की बात करें तो कांवड़ मेला पूरी दुनिया में धूम मचा चुका है। इस बार तो कांवड़ मेले की वजह से उत्तराखंड ने नया रिकॉर्ड भी तैयार कर लिया है। इस बार रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं ने कांवड़ मेले में हिस्सा लिया है। सीएम त्रिवेंद्र रावत ने बकायदा फेसबुक पेज पर इस बात की जानकारी भी दी है। सीएम त्रिवेंद्र ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है कि ‘धर्मनगरी हरिद्वार में सरकार के व्यापक प्रबंधों के बीच इस साल कांवड़ मेले में 3 करोड़ 70 लाख से ज्यादा श्रद्धालु हरिद्वार आ चुके हैं, ये उत्तराखंड के लिए गौरव की बात है। भव्य कांवड़ मेले के शांतिपूर्वक सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन एवं सभी श्रद्धालुओं को बधाई।’ अब आपको बताते हैं कि किस तरह से ये रिकॉर्ड तैयार हुआ है।

कहा जा रहा है कि इस बार कांवड़ की भीड़ कुंभ मेले को भी मात दे गई। पंचपुरी पर कांवड़ियों की भीड़ पटी थी। हाईवे पर जहां तक भी नजर पहुंचती है वहां कांवड़िए ही नजर आते हैं। भोलेनाथ को ध्याने के लिए गंगा मैया को ले जाते हुए जगह जगह लाखों की भीड़ लगी है। चारों और हर हर महादेव, बम बम भोले, जय शिव शंकर के उद्घोष से धघर्मनगरी गूंज उठी। हर साल श्रावण मास में लाखों की तादाद में कांवडिये सुदूर स्थानों से आकर गंगा जल से भरी कांवड़ लेकर पदयात्रा करके अपने गांव वापस लौटते हैं इस यात्रा को कांवड़ यात्रा बोला जाता है। श्रावण की चतुर्दशी के दिन उस गंगा जल से अपने निवास के आसपास शिव मंदिरों में महादेव का अभिषेक किया जाता है। कहने को तो ये धार्मिक आयोजन भर है, लेकिन इसके सामाजिक सरोकार भी हैं। पानी आम आदमी के साथ साथ पेड पौधों, पशु - पक्षियों, धरती में निवास करने वाले हजारो लाखों तरह के कीडे-मकोडों और समूचे पर्यावरण के लिए बेहद आवश्यक वस्तु है।

कांवड के माध्यम से जल की यात्रा का ये पर्व सृष्टि रूपी शिव की आराधना के लिए है। उत्तर भारत की भौगोलिक स्थिति को देखें तो यहां के मैदानी इलाकों में मानव जीवन नदियों पर ही आश्रित है। कांवड यात्रा का आयोजन अति सुन्दर बात है। लेकिन शिव को प्रसन्न करने के लिए इन आयोजन में भागीदारी करने वालों को इसकी महत्ता भी समझनी होगी। प्रतीकात्मक तौर पर कांवड यात्रा का संदेश इतना भर है कि आप जीवनदायिनी नदियों के लोटे भर जल से जिस भगवान शिव का अभिषेक कर रहे हें वे शिव वास्तव में सृष्टि का ही दूसरा रूप हैं। धार्मिक आस्थाओं के साथ सामाजिक सरोकारों से रची कांवड यात्रा वास्तव में जल संचय की अहमियत को उजागर करती है। कांवड यात्रा की सार्थकता तभी है जब आप जल बचाकर और नदियों के पानी का उपयोग कर अपने खेत खलिहानों की सिंचाई करें और अपने निवास स्थान पर पशु पक्षियों और पर्यावरण को पानी उपलब्ध कराएं तो प्रकृति की तरह उदार शिव सहज ही प्रसन्न होंगे।


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