पहाड़ों से आज की सबसे शर्मनाक खबर, ऐसा तो कभी सोचा ही नहीं था

पहाड़ों से आज की सबसे शर्मनाक खबर, ऐसा तो कभी सोचा ही नहीं था

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पहाड़ों में किस तरह से स्वास्थ्य सेवाओं का ध्यान रखा जा रहा है , इस बारे में खुलासा करती एक रिपोर्ट हम आपके सामने लेकर आए हैं। ये रिपोर्ट ये साबित करती है कि किस तरह से पहाड़ों में नियम और कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वैसे देखा जाए तो पहाड़ों में चिकित्सा सेवाओं की बदहाली पहले भी सवालों के घेरे में रही है। लेकिन अब ये खबर सवाल खड़े कर रही है कि आखिर कब तक इस तरह से चलता रहेगा ? हम बात कर रहे हैं रुद्रप्रयाग जिले के जखोली ब्लाक की, जखौली ब्लॉक में मौजूद है चौरा यहां एएनएम सेंटर में एएनएम ने इस वजह से प्रसव करने से मना कर दिया क्योंकि प्रसव कक्ष की सफाई नहीं हुई थी। सवाल सफाई का सामने आ गया। तो क्या ये मरीजों की जिम्मेदारी है कि प्रसव कक्ष की सफाई भी वो खुद करें। इस वजह से प्रसव से पीड़ित महिला को सड़क पर ही अपने बच्चे को जन्म देना पड़ा।

शर्म आती है ऐसे लोगों पर जो अपनी ड्यूटी को नहीं समझ रहे हैं। इस तरीके से बार बार नियम और कानूनों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। रुद्रप्रयाग की मुख्य चिकित्सा अधिकारी सरोज नैथानी ने इस बारे में कहा है कि इस मामले की जांच कराई जाएगी। दरअसल भटवाड़ी गांव की रहने वाली इंद्रा देवी अपनी गर्भवती बहू को लेकर निजी वाहन से जखोली स्थित एएनएम सेंटर पहुंची। इंद्रा देवी के मुताबिक उन्होंने एएनएम से निवेदन किया कि उनकी बहू को प्रसव पीड़ा हो रही है। इस वजह से उन्ह8ोंने बहू को भर्ती करने की बात कही थी। इंद्रा का आरोप है कि एएनएम बसंती सकलानी ने कहा कि प्रसव कक्ष की सफाई अभी नहीं हुई है। ऐसे में वो पीड़ित महिला को भर्ती नहीं कर सकती। एएनएम का कहना था कि ये सीएमओ का निर्देश है। इंद्रा का कहना है कि करीब आधे घंटे तक वो एएनएम को मनाती रही। लेकिन एएनएम को शायद गर्भवती की प्रसव पीड़ा से ज्यादा सीएमओ के आदेश की चिंता थी, इसलिए ऐसा हुआ है।

फिर क्या था, देवभूमि की सड़क पर वो हो गया, जो शायद आज तक कभी नहीं हुआ होगा। वहां लोगों की भीड़ भी जमा हुई, लोगों ने एएनएम को समझाने की कोशिश की, लेकिन एएनएम के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। सड़क पर खड़े वाहन तक पहुंचने से पहले ही प्रसव पीड़ा बढ़ गई।आसपास के लोगों को मद के लिए बुलाया गया। एएनएम बसंती का कहना है कि सुबह-सुबह प्रसव कक्ष की सफाई नहीं हुई थी। अब ये जिम्मेदारी कौन लेगा, क्या सफाई की जिम्मेदारी भी अब गांव वालों को ही दी जानी चाहिए ? खैर मुख्य चिकित्सा अधिकारी का घटना को गंभीर बताते हुए उन्होंने कहा कि इसकी जांच करा दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल ये है कि आखिर कब पहाड़ों में इस तरह की बेफिक्री चलती रहेगी। अगर इस बीच प्रसव पीड़ित को कुछ होता तो इसका जवाब कौन देता ? क्या फिर से सफाई का ही बहाना देना पड़ता।


Uttarakhand News: Delivery of woman on road at rudraprayag

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