देवभूमि की इस बेटी से कुछ सीखिए...शहर छोड़ा, गांव आई और इस तरह रचा इतिहास...

देवभूमि की इस बेटी से कुछ सीखिए...शहर छोड़ा, गांव आई और इस तरह रचा इतिहास...

Success story of ranjana rawat - उत्तराखंड न्यूज, uttarakhand news, ranjana rawat उत्तराखंड,

कहते हैं हिम्मत और सफलता के बीच एक छोटी सी डोर होती है, जिसे भरोसा कहते हैं। ये भरोसे की डोर अगर टूटी तो कुछ नहीं बचता। लेकिन अगर भरोसा कायम है तो आप कुछ भी कर सकते हैं। कुछ ऐसा ही भरोसा था देवभूमि की इस बेटी को खुद पर। मंजिल तय कर ली थी और अब कदम बढ़ाने थे। कदम बढ़ते गए, कारवां बनता गया और इस सफलता के सफर में कई लोगों का साथ मिलता रहा। ये कहानी है उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले की रहने वाली रंजना रावत की। ये कहानी पढ़कर आपको अपनी देवभूमि की नारियों पर गर्व तो होगा ही, लेकिन इसके साथ ही एक प्रेरणा भी मिलेगी कि सिर्फ हाथ पर हाथ रखकर और रोजगार के लिए सरकार को कोसने से कुछ नहीं होता, कभी कभी खुद भी कदम उठाना पड़ता है। रंजना रावत रुद्रप्रयाग जिले के भीरी गॉव की रहने वाली हैं। शहर की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर रंजना गांवों के लिए चल पड़ी।

गांव जाकर रंजना ने अमेरिकन सेफ्रॉन उगाई। अमेरिकन सेफ्रॉन कोई छोटी मोटी चीज नहीं है। इसकी बाजार में कीमत 1 लाख रुपये किलोग्राम है। इसकी फसल को अक्टूबर में लगाया जाता है। आखिरकार रंजना की ये मेहनत रंग लाई, उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए दुनिया को बताया कि असल जिंदगी की शुरुआत गांवों से ही होती है। रंजना आज ग्रामीण स्वरोजगार मिशन के तहत कई बेरोजगारों को उन्नत खेती के गुर सिखा रही है। इसके साथ ही रंजना ने मशरूम की खेती भी की है। इस तरह से रंजना रावत ने उत्तराखंड में रिवर्स माइग्रेशन की उम्मीदों को नया आयाम दिया है। इसके साथ ही स्वरोजगार की नई नीति को पंख लगा दिए हैं। इसके साथ ही खास बात ये है कि रंजना स्ट्रॉबेरी की खेती भी कर रही हैं। यूं तो स्ट्रॉबेरी की खेती जमीन पर ही होती है, लेकिन रंजना के गांव में इसे पाइप और बोतलों के जरिये हवा में टांग के किया जा रहा है।

इसका फायदा ये है कि स्ट्रॉबेरी पर मिट्टी नहीं लगती। ये स्ट्रॉबेरी टॉप क्वॉलिटी की है। इसके अलावा रंजना ने अपने गांव में कई और साग सब्जियां भी उगाई हैं। आलम ये है कि रंजना आज सफलता की एक नई कहानी लिख रही हैं। दूर दूर से लोग खेती के बारे में जानकारी लेने के लिए रंजना के पास पहुंच रहे हैं। रंजना के इन प्रयासों की वजह से उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है। आज रंजना ने उ्तराखंड के तमाम युवाओं को एक सीख जी है कि आप तब ही कोई काम कर सकते हैं, जब तक आपके भीतर कुछ करने की ललक ना हो। उत्तराखंड के युवा आज बेरोजगारी का रोना रो रहे हैं। तो दूसरी तरफ रंजना जैसी बेटियां हैं, जो नौकरी छोड़कर, अपने गांव वापस जाकर खेती के जरिए नाम, पैसा और शोहरत कमा रही हैं। सिर्फ हाथ पर हाथ रखकर बैठने से कुछ नहीं होता। इसके लिए आपको कोशिश करनी पड़ती है। कुछ प्रयास करने पड़ते हैं। तब जाकर आप सफलता के शिखर पर पहुंचते हैं। पहाड़ की इस ‘शक्ति’ को हमारा सलाम। जय उत्तराखंड


Uttarakhand News: Success story of ranjana rawat

Content Disclaimer (Show/Hide)
लेख शेयर करें