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Image: Hiprophy salicifolia plant will stop disaster

उत्तराखंड में पलायन और आपदा रोकेगी ये संजीवनी…ये है ‘बद्री’ विशाल लाल की कृपा !

उत्तराखंड में पलायन और आपदा रोकेगी ये संजीवनी…ये है ‘बद्री’ विशाल लाल की कृपा !

बदरी के पेड़ के बारे में तो आप जानते ही होंगे। भगवान बदरीनाथ और उनके सेवक कुलदेव घंटाकर्ण की भोजन थाल में ये फल सजाया जाता है। इस विशेष फल 'बदरी बेर' के कुछ और अहम रहस्य खुले हैं। एक ताजा शोध हुआ है। इस शोध के मुताबिक औषधीय गुणों से भरपूर ये फल लाइलाज कैंसर के खात्मे में कारगर तो है ही। इसके अलावा ये पेड़ हिमालयी क्षेत्र की जमीन की सेहत सुधारने और भूकटाव रोकने में भी असरदार है। समुद्र तल से 2200 से 3300 मीटर की ऊंचाई पर भगवान बदरीनाथ की धरा के धार्मिक फल 'बदरी बेर' को वैज्ञानिक भाषआ मेंहिपोफी सेलीसिफोलिया कहा जाता है। इस पर शोध की रिपोर्ट आई तो हर कोई हैरान रह गया। क्या आप जानते हैं इस पेड़ से उत्तराखंड में आपदा रुक सकती है,च पलायन रुक सकता और रोजगार के मौके पैदा हो सकते हैं। शोध के अनुसार बदरी बेर के पेड़ की जड़ें मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी को पूरा कर उर्वरा शक्ति को बढ़ाती हैं।

इससे अनुपजाऊ जमीन भी आबाद हो सकती है। इसकी जड़ें मिट्टी को इस कदर बांधे रखती है, कि संबंधित क्षेत्र में भू-कटाव व भू-क्षरण कतई नहीं होता। बदरी बेर से कैंसर के इलाज को अब तक पांच उत्पाद तैयार करने के बाद जड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान के वैज्ञानिक उच्च हिमालय में मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और अतिवृष्टि में भू-कटाव एवं मिट्टी का क्षरण रोकने के लिए इस फल के पेड़ों का रक्षा कवच तैयार करने में जुट गए हैं। इसके तहत भूस्खलन और बंजर रेतीली जमीन पर वृहद पौधरोपण कर उसे हरा भरा बनाने की तैयारी कर ली गई है। ड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान के कुमाऊं प्रभारी डॉ. विजय भट्ट के मुताबिक औषधीय गुणों वाले बदरी बेर पर शोध जारी है। इसके पेड़ों की जड़ों में मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने की जो खूबी सामने आई है, वो उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने वाली है।

ये भूकटाव और मिट्टी का क्षरण रोकने में भी असरदार है, इसलिए वैज्ञानिकों ने उच्च इलाकों में भूस्खलन प्रभावित इलाके चिह्नित कर पौधरोपण का काम शुरू कर दिया है। इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। कहा जा रहा है कि हर गांव वाले को इस बारे में समझाया जाएगा। कैंसर का तो ये अचूक इलाज है ही, इस वजह से लोगों को इस औषधि को उगाने के लिए कहा जाएगा। इसके साथ ही माना जा रहा है कि इसके बड़े दाम लोगों को दिए जाएंगे। पलायन तो रुकेगा ही, इसके साथ ही रोजगार के भी साधन मिलेंगे। वैज्ञानिक 'बदरी बेर' का उत्पादन बढ़ाने के लिए पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी की ऊंची चोटियों पर एक-एक हेक्टेयर में पौधालय तैयार कर रहे हैं। अब राज्य में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित धारचूला, दारमा के साथ ही नीती व माणा, गंगोत्री, यमुनोत्री, उत्तरकाशी, चमोली जैसे इलाकों में वृहद पौधरोपण का खाका तैयार कर लिया है। ताकि वहां की मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़े, हरियाली आए और भूकटाव भी काम किया जा सके।

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